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जांच अधिकारी की चूक का लाभ आरोपी को मिलना चाहिए : अदालत

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आरोपी की न तो पहचान परेड कराई और न ही वीडियोग्राफी, कोर्ट ने बरी किया
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मुजेसर थाना में 2 अगस्त 2017 को दर्ज हुई थी एफआईआर

सोनू यादव
फरीदाबाद। मोबाइल झपटमारी के मामले में जांच अधिकारी ने न तो आरोपी नरेश कुमार को पकड़ने के बाद उसकी पहचान परेड कराई, न ही कोई वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी गिरफ्तारी, बरामदगी या निशानदेही के समय पर कराई गई। जांच अधिकारी ने अदालत के सामने भी गवाही दी कि उसने बरामदगी व पूछताछ के दौरान कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया। साथ ही केस में शिकायतकर्ता ने इतने समय तक बरामद हो चुके मोबाइल को रिलीज भी नहीं कराया। इन सभी तथ्यों पर अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से मामले में चूक है, इसका लाभ आरोपी को मिलना चाहिये। ये कहते हुए मोबाइल झपटमारी के मामले में जिला अदालत ने आरोपी नरेश को बरी कर दिया।

मुजेसर थाने में मोबाइल झपटमारी की धारा में ये एफआईआर 2 अगस्त 2017 को दर्ज हुई थी। सुमित ने पुलिस को शिकायत दी कि 1 अगस्त 2017 की शाम साढ़े 7 बजे वो अपने घर की ओर बाइक से जा रहे थे । आरोप है कि दो युवकों ने उसे रोका और पहले रुपये मांगे, फिर कॉल करने के लिए मोबाइल मांगा। जब इसने मना किया तो एक आरोपी ने जबरन मोबाइल छीना और भाग गया। एक आरोपी का नाम नरेश बताया गया और दूसरे का विशाल। सुमित ने कहा कि वो अपने दोस्त जीत व आकाश के साथ आरोपियों की तलाश में मछली मार्केट गया। वहां पर आरोपी दिखे और भागने लगे। लेकिन पब्लिक की मदद से नरेश का पीछा किया तो वो भागते हुए गिर गया और पकड़ लिया जबकि विशाल भाग गया। किसी ने पुलिस को कॉल कर सूचना दी लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही नरेश भी भाग गया।
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पुलिस ने जांच करते हुए 3 अगस्त को नरेश और 9 सितंबर को विशाल को गिरफ्तार किया। नरेश बाद में जमानत पर आने के बाद गैर हाजिर हो गया और 10 अगस्त 2018 को उसे भगौड़ा करार दिया गया। 15 मार्च 2019 को मामले में विशाल बरी हो गया था। साल 2022 में पुलिस ने नरेश को गिरफ्तार किया जिसके बाद ट्रायल चला। अब अदालत ने नरेश को पुख्ता सबूतों व गवाहों के अभाव में बरी कर दिया है।
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