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Faridabad News: साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों को जेल भेजा

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3.10 लाख रुपये, दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। टेलीग्राम पर पार्ट-टाइम नौकरी और क्रिप्टो ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों को साइबर थाना सेंट्रल की पुलिस ने मंगलवार को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के कब्जे से 3.10 लाख रुपये नकद, दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि सेक्टर-31 निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि 15 मई को उसे व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर टेलीग्राम के माध्यम से घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी और ऑनलाइन टास्क पूरे कर कमाई का लालच दिया गया।
शुरुआत में ई-कॉमर्स वेबसाइट के उत्पादों के लिंक पर क्लिक कर स्क्रीनशॉट भेजने जैसे छोटे कार्य कराए गए और बदले में कुछ राशि भी भेजी गई, जिससे पीड़ित का विश्वास जीत लिया गया। इसके बाद उसे फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर 30 से 50 प्रतिशत तक का काल्पनिक मुनाफा दिखाकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। पीड़ित ने 17 मई से एक जून 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 43,12,928 रुपये जमा कर दिए। बाद में निकासी रोक दी गई और केवाईसी, अकाउंट अपग्रेड व अन्य शुल्क के नाम पर और रुपये मांगे गए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दी।
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जांच के दौरान पुलिस ने 17 जून को प्रशांत शर्मा, विक्रम सिंह और विवेक कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि विवेक ने अपना बैंक खाता विक्रम को उपलब्ध कराया था, जिसे विक्रम ने प्रशांत तक पहुंचाया। प्रशांत ने बैंक खाता और उससे जुड़े दस्तावेज कोरियर के माध्यम दस्तावेज साइबर ठगों तक पंहुचाए। इस खाते में ठगी के करीब 3.80 लाख रुपये आए थे।

इसके बाद दो जुलाई को गौरव कुमार, रेहान अहमद शाह और रणजीत को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि रणजीत ने खाताधारक विकास का बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था, जिसमें 16 हजार रुपये आए थे। वहीं खाते से जुड़ी सिम गौरव के नाम पर थी, जबकि उसका इस्तेमाल रेहान कर रहा था। रेहान उसी सिम पर आने वाले ओटीपी साइबर ठगों तक पहुंचाता था। खाताधारक विकास अभी गायब है।
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नौ जुलाई को पुलिस ने मनोज, दीपक, अस्मित और रोहतक निवासी एक महिला को भी गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि मनोज ने महिला के नाम पर बैंक खाता खुलवाकर दीपक के माध्यम से टेलीग्राम पर अस्मित तक पहुंचाया। इस खाते में ठगी के 19 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे। गिरोह में अलग-अलग लोग बैंक खाते, सिम कार्ड और ओटीपी उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। जांच में सामने आया कि ठगी की 43.12 लाख रुपये की राशि पहले चरण में 14 बैंक खातों और छह यूपीआई खातों में भेजी गई थी। पुलिस बाकी अन्य आरोपियों की तलाश के साथ पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
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