शहर की प्रमुख सड़कों पर लगाए गए पौधे, गमले, ट्री गार्ड और ग्रीन बेल्ट देखभाल के अभाव में बदहाल हैं
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में गर्मी और प्रदूषण लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले का अधिकतम तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर दर्ज हो रहा है और शहर देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में भी कई बार शामिल हो चुका है। हरियाली बढ़ाने के लिए नगर निगम, एफएमडीए और वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। शहर की प्रमुख सड़कों पर लगाए गए पौधे, गमले, ट्री गार्ड और ग्रीन बेल्ट देखभाल के अभाव में बदहाल हैं जिससे पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में पिछले पांच वर्षों के दौरान गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ा है। वायुमंडल में आए बदलाव और हरियाली की कमी के कारण सालाना औसत तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2022 और 2024 में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। जबकि 2000 से 2010 के बीच अधिकतम तापमान 45.2 और 2011 से 2020 के बीच यह तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं 2020 के बाद 2025 तक सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है जो 28 मई को 48 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से घटती हरियाली, कंक्रीट का बढ़ता दायरा और वाहनों व उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव को बढ़ा रहा है जिससे शहर का तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक महसूस होता है।
प्रदूषण में भी देश के सबसे खराब शहरों में शामिल जिला
फरीदाबाद लंबे समय से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और स्विस संस्था आईक्यूएयर की विभिन्न रिपोर्टों में शहर कई बार देश के शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। वर्ष 2025 की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट और हालिया क्रेडिबल पर्यावरण रिपोर्ट्स के अनुसार फरीदाबाद देश के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में बना हुआ है और खराब वायु गुणवत्ता के मामले में देश में दूसरे से लेकर शीर्ष पायदान के बीच डोलता रहा है। सर्दियों में यहां का औसत एक्यूआई 400 के पार (गंभीर श्रेणी) पहुंच गया था।
विभागों ने खर्च किए 12 करोड़ से अधिक पर देखरेख में लापरवाही
पौधरोपण के नाम पर सरकारी विभागों ने बजट पानी की तरह बहाया है। तीनों प्रमुख विभागों नगर निगम, वन विभाग और एफएमडीए ने मिलकर पिछले एक से डेढ़ साल में कुल 3 लाख 81 हजार से अधिक पौधे लगाने व वितरित करने का दावा किया है, जिस पर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
मुख्य मार्गों पर सूखे गमले, टूटी फेंसिंग
नीलम फ्लाईओवर, सेक्टर-8 मुख्य मार्ग सहित शहर की कई प्रमुख सड़कों पर लगाए गए बड़े सजावटी गमले अब बिना पौधों के केवल मिट्टी से भरे दिखाई दे रहे हैं। नगर निगम द्वारा लगाए गए लगभग 1500 बड़े गमलों में से बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं। कई स्थानों पर महीनों से सिंचाई नहीं होने के कारण गमले वीरान पड़े हैं। वहीं मथुरा रोड पर एनएचएआई की तरफ से लगाए गए पौधे भी बड़ी संख्या में सूख रहे हैं और जगह-जगह से फेंसिंग टूटी हुई है। सेक्टर-12 में एफएमडीए के ऑफिस की तरफ जाने वाले मार्ग पर ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा के लिए लगाई गई ग्रिल भी टूट रही है। भगत सिंह चौक पर भगत सिंह की जयंती पर भव्य आयोजन किया गया था। इसके लिए यहां पौधे लगाने के साथ सजावट की गई थी, लेकिन अब यहां पौधे सूख चुके हैं और कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
जांच के आदेश, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं
करीब दो महीने पहले नगर निगम ने पौधों की देखभाल में लापरवाही के मामले की जांच संबंधित अधीक्षण अभियंता (एसई) को सौंपी थी। हालांकि अभी तक जांच पूरी होने या किसी अधिकारी अथवा एजेंसी पर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में शहरवासियों का कहना है कि यदि पौधरोपण के बाद नियमित रखरखाव सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तो हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। जब इस मामले की जांच कर रहे अधीक्षण अभियंता ओमवीर सिंह से जांच और एक्शन के बारे में जानने का प्रयास किया गया, तो कई बार कॉल करने के बाद भी उनकी तरफ से कोई रिस्पांस नहीं दिया गया।
इस मामले की जानकारी नहीं है, मेरे आने से पहले का मामला है। इसकी जांच जिन अधिकारी को सौंपी गई है, वही इसका स्टेटस बता सकते हैं।- अमित, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम फरीदाबाद