एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से की जा रही पूरे मामले की जांच
डीटीपी, राजस्व समेत अन्य विभागों के अधिकारियों ने मिलकर किया है सरकारी राजस्व का नुकसान
सोनू यादव
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में अवैध कॉलोनी बसाने वाले डीलरों व प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ को लेकर चल रही एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच बीच में रुक गई है। इसका कारण ये है कि तहसीलदारों की ओर से जांच के लिए जरूरी डेटा एसीबी को नहीं दिया जा रहा है।
एसीबी ये जांच कर रही है कि बीते 10 साल के दौरान जिले में विकसित हुईं 1017 अवैध कॉलोनियों में कितनी रजिस्ट्री हुईं। ये रजिस्ट्री का डेटा तहसीलदार ही उपलब्ध करा सकते हैं। इसे लेकर एसीबी की ओर से 4 बार पत्र लिखा जा चुका है। इसमें ये पूछा जा रहा है कि इन 1017 अवैध कॉलोनियों में तहसीलवार कितनी रजिस्ट्री इस अवधि में की गई। इनके आधार पर ये आंकलन किया जाना है कि इन अवैध कॉलोनियों में की गई रजिस्ट्री के चलते सरकार को राजस्व का कितना नुकसान हुआ है। मामले में अब तक जांच में सामने आया है कि प्रॉपर्टी डीलरों व प्रशासनिक अधिकारियों के इस गठजोड़ ने 10 साल में 1017 अवैध कॉलोनियां बसा दी हैं। एचएसवीपी और डीटीपी एनफोर्समेंट की टीमों ने मिलकर इन कॉलोनियों में जाकर तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। लेकिन इस कार्रवाई के बावजूद भी ये अवैध कॉलोनियां बसना हैरान करने वाला है। आरोप है कि महज खानापूर्ति करते हुए तोड़-फोड़ कार्रवाई का दिखावा किया गया और बाद में डीलरों से गठजोड़ कर ये कॉलोनियां बसवा दी गई।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर चल रही जांच
एंटी करप्शन ब्यूरो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर ये जांच शुरू की गई है। आरोप है कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि ये अवैध कॉलोनियां न बसें, उन्होंने अपना काम सही से नहीं किया। उल्टे अपनी जेबें भरकर आम जनता को इन डीलरों के जाल में फंसने के लिए छोड़ दिया। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर का डेटा भी जांच के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो ने तैयार किया है।
एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर संतराम सिंह ने बताया कि बीते 10 साल के दौरान 1017 अवैध कॉलोनियां बसने की जांच की जा रही है। तोड़-फोड़ के नाम पर महज खानापूर्ति हुई और बाद में कॉलोनियां बसती चली गई। इन कॉलोनियों में हुई रजिस्ट्री का डेटा लेने के लिए 4 बार पत्र लिखा गया है लेकिन डेटा नहीं मिला है।