-स्वीटी डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने मंगलवार को 10वीं का परीक्षा परिणाम जारी किया। इसमें बल्लभगढ़ की स्वीटी कुमारी प्रदेश में तीसरे स्थान पर आईं हैं, जबकि जिले में दूसरे स्थान पर गौरव और तृतीय स्थान पर प्रशांत रहे। परीक्षा परिणाम जारी होते ही शिक्षकों ने बधाई देना शुरू कर दिया।
डॉक्टर बनना चाहती है स्वीटी
फरीदाबाद। प्रदेश में तृतीय स्थान पर रहने वाली स्वीटी कुमारी डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना चाहती हैं। वह मेडिकल लेकर पढ़ाई करना चाहती हैं। पढ़ाई के दौरान वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करती है। उनका मानना है कि अगर कुछ वर्ष पढ़ाई कर लेंगी, तो भविष्य संवर जाएगा। अगर ऐसा नहीं करती है, तो भविष्य में हर प्रकार से समझौता करना पड़ेगा। सफलता का मात्र एक मंत्र है, वह है पढ़ाई। परीक्षा के बाद वह समझ गई थीं कि वह जिले में किसी न किसी स्थान पर रहेंगी, लेकिन उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि वह प्रदेश में तीसरे स्थान पर आएंगी। पिता संजय कुमार दुबे और मां माया देवी ने बेटी की इस कामयाबी पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि बेटी शुरू से मेधावी रही है।
कुल अंक 496/500
हिंदी -100, अंग्रेजी - 97, गणित - 99, सोशल साइंस - 93, विज्ञान - 100
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मैनेजमेंट में करियर बनाना चाहते हैं गौरव
जिले में दूसरे स्थान पाने वाले गौरव सिंगल देश के बेहतरीन कॉलेज से मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहते हैं। उसके स्कूल में 12वीं का पाठ्यक्रम नहीं होने के कारण वाणिज्य की पढ़ाई करने के लिए केंद्रीय विद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं। इसके बाद वह दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं। उनका कहना है कि मैं रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करता हूं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण शुरू से ही स्वयं पढ़ाई करता रहा हूं। स्कूल के शिक्षक का पूरा सहयोग रहा है। पिता मुकेश कुमार व मां साक्षी को अपने बेटे पर गर्व है। उनका कहना है कि पढ़ाई के दौरान वह सोशल मीडिया से दूर रहे।
कुल अंक 494/500
हिंदी -93, अंग्रेजी - 99, गणित - 100, सोशल साइंस - 97, विज्ञान - 99
वैज्ञानिक बनना चाहते हैं प्रशांत
जिले में तृतीय स्थान पर रहने वाले प्रशांत का लक्ष्य वैज्ञानिक बनना है। इसके लिए वह अभी से ही तैयारी में लग गए हैं। वह गणित और भौतिकी को अपना मुख्य विषय बनाना चाहते हैं। 12वीं में वह विज्ञान की पढ़ाई करना चाहते हैं। जिससे वह जेईईई की परीक्षा को पास कर सकें। पढ़ाई के दौरान वह किसी प्रकार का समझौता करना पसंद नहीं करते हैं। उनके पिता एक निजी कंपनी में सहायक श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह अपनी मेहनत पर ज्यादा विश्वास करते हैं। रोजाना 6-7 घंटा स्वयं पढ़ाई करते हैं। पिता घनश्याम व सुमन लता ने खुशी जताई है।
कुल अंक 492/500
हिंदी -95, अंग्रेजी - 99, गणित - 100, सोशल साइंस - 88, विज्ञान - 99