सूरजकुंड मेला शनिवार से शुरू हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसका शुभारंभ करते हुए कहा कि भारत त्योहारों और मेलों का देश है। सूरजकुंड मेले में भारत के गांवों की खुशबू और हमारी समृद्ध संस्कृति के विविध रंग यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करते हैं।
भारत की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मेले में शिल्पकारों और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों के पहनावे, लोक-कलाओं, व्यंजनों, संगीत और लोक-नृत्यों का भी संगम होता है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भारत के लोगों के कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का एक स्थापित मंच बन गया है। यह मेला विलुप्त हो रही हस्तशिल्प और हथकरघा की विशेष कला-विधाओं को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और कारीगरों को उनके काम को प्रदर्शित करने का उचित मंच प्रदान कर रहा है। इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव आर्य, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व उज्बेकिस्तान के राजदूत फरहोद अरजीव मौजूद थे।
उज्बेकिस्तान के साथ दिलों के रिश्ते
राष्ट्रपति कोविंद ने सहभागी देश उज्बेकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि बेशक हमारी भौगोलिक सीमा नहीं मिलती लेकिन हमारे बीच दिलों के रिश्ते हमेशा से रहे हैं। भविष्य में यह और अधिक सुदृढ़ होंगे। यह मेला भारत व उज्बेकिस्तान के लोगों के बीच संस्कृति, कला एवं कृषि के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी प्रस्तुत करेगा। मेले में देश और विदेश के पर्यटक आते हैं। भारत के सभी त्योहार और मेले हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक उल्लास के प्रतीक है।
हिमाचली नाटी पर थिरके लोग
शिमला। मेले के शुभारंभ के बाद लोग हिमाचली नाटी पर जमकर थिरके। देश-विदेश के सैलानियों को हिमाचली धाम भी परोसी गई। देवभूमि के विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पाद मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सूरजकुंड मेला 16 फरवरी तक चलेगा। सीएम जयराम ने कहा कि विश्व के इस सबसे बड़े शिल्प मेले में हिमाचल को थीम राज्य बनने का विशेष सम्मान प्राप्त होने से प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। यह मेला हिमाचल के उत्पादों को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।