फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: हरे रंग में छिपी चीनी सी मिठास, पिनगवां का कैथली बेर बना लोगों की पहली पसंद

विज्ञापन
विज्ञापन
80 रुपये किलो भाव, फिर भी जबर्दस्त मांग, बागवानी विभाग को लाखों की आमदनी
विज्ञापन




सद्दाम हुसैन



पिनगवां। स्थित राजकीय बाग एवं नर्सरी पिनगवां तथा प्याज उत्कृष्टता केंद्र इन दिनों कैथली बेर की मिठास से महक रहा है। करीब चार एकड़ में फैली इस खास किस्म की फसल बाजार में आते ही लोगों की पहली पसंद बन गई है। आलम यह है कि 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकने के बावजूद खरीदारों की भीड़ कम नहीं हो रही। सेब, संतरा, अंगूर, केला, पपीता और तरबूज जैसे फलों से अधिक दाम होने के बाद भी कैथली बेर की मांग लगातार बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार नर्सरी परिसर में लगभग 10 एकड़ भूमि में बेर का बाग लगा है, जिसमें गोला और कैथली दो वैरायटी शामिल हैं। गोला बेर भले ही कुछ दिन पहले बाजार में पहुंच जाता हो, लेकिन जैसे ही कैथली बेर की एंट्री होती है, ग्राहक सीधे उसी की ओर रुख कर लेते हैं। देखने में हरे रंग का यह बेर स्वाद में चीनी जैसी मिठास लिए होता है और इतना मुलायम कि बुजुर्ग भी इसे आसानी से खा सकते हैं। जिला बागवानी विभाग को इस बाग से प्रतिवर्ष लगभग साढ़े चार लाख रुपये की आय होती है। वहीं ठेकेदार भी लाखों का मुनाफा कमा लेते हैं। खास बात यह है कि करीब दो महीने तक चलने वाले इस सीजन में रोजाना बेर तोड़ने के लिए आने वाली महिला मजदूरों को रोजगार मिलता है। इसके साथ ही रेहड़ी, पटरी और छोटे विक्रेताओं की आमदनी भी बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कैथल जिले से दो दशक पहले आई थी यह खास किस्म
बताया जाता है कि कैथली बेर की यह खास किस्म मूल रूप से कैथल जिले से करीब दो दशक पहले यहां लाई गई थी। पिनगवां की भूमि और जलवायु में यह किस्म खूब फल-फूल रही है और बेहतरीन गुणवत्ता का उत्पादन दे रही है। दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में रहने वाले लोग भी इसे सौगात के तौर पर खरीदकर ले जाते हैं। बाजार में अन्य राज्यों से आने वाली कई वैरायटी मौजूद हैं, लेकिन कैथली बेर के आते ही बाकी फल फीके पड़ जाते हैं। पिनगवां का यह हरा-भरा बेर अब क्षेत्र की पहचान बन चुका है और किसानों से लेकर मजदूरों तक सबके चेहरे पर मिठास घोल रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें