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Faridabad News: पुरानी किताबों से नए सपने बुन रहे छात्र

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नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 18 दिन बाद भी स्कूलाें में नहीं पहुंची किताबें
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अधिकारियों ने 15 अप्रैल तक जिले में किताबें आने का दावा किया था
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के 18 दिन बीत चुके हैं लेकिन विद्यालयों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं। जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों ने 15 अप्रैल तक जिले में किताबें आने का दावा किया था लेकिन अधिकारियों का यह दावा खोखला साबित हुआ। विद्यालय के छात्र पुरानी किताबों से ही नए सपने बुनने को मजबूर हैं। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है, बल्कि नए सत्र की शुरुआत का उत्साह भी फीका पड़ता नजर आ रहा है। किताबों की अनुपलब्धता के कारण छात्रों के उत्साह में कमी देखने को मिल रही है।

जिले में 378 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और वरिष्ठ विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 1.25 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा के साथ किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
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विद्यालयों में किताबें न होने के कारण नई कक्षा में आने वाले छात्रों से किताबें जमा करवा ली है, उन्हीं किताबों से छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि नई किताबें आने के बाद छात्रों को किताबें वापस लौटा दी जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि नई कक्षाओं में आने वाले छात्रों के लिए पुरानी किताबें किसी काम की नहीं हैं। हालांकि नई किताबें आने के बाद छात्र चाहे तो अपनी किताबें वापस ले सकते हैं।

पाठ्यक्रम में हुए बदलाव के कारण छात्रों को हो सकती है दिक्कत

इस बार पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। ऐसे में पुरानी किताबों से पढ़ने वाले छात्रों को दिक्कत हो सकती है। नई किताबें आने के बाद छात्रों को पाठ्यक्रम नए सिरे से पढ़ना पड़ेगा। इसमें छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। इसके अलावा किताबें आने में हो रही देरी के कारण अभिभावक विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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-वर्जन
अभी विद्यालयों में कक्षा तत्परता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कार्यक्रम खत्म होने से पहले विद्यालयों में किताबें पहुंचा दी जाएंगी।- बसंत कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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