शिविर का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं डीएलएसए के चेयरमैन संदीप गर्ग के मार्गदर्शन में तथा सीजेएम एवं डीएलएसए के सचिव जितेंद्र सिंह की देखरेख में हुआ। सीजेएम जितेंद्र सिंह ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराध से सुरक्षा प्रदान करने वाला सशक्त कानून है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति कानून की नजर में बच्चा है। ऐसे मामलों में नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों को जांच प्रक्रिया, दोषियों के लिए निर्धारित सजा और पीड़ित बच्चों को उपलब्ध कानूनी सहायता की भी जानकारी दी। मुख्य रक्षा अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता ने पॉक्सो अधिनियम के तहत अनिवार्य सूचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी बच्चे के साथ यौन अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस या संबंधित प्राधिकारी को सूचना देना प्रत्येक नागरिक का कानूनी दायित्व है। ब्यूरो