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Faridabad News: बनारसी हथकरघा की समृद्ध परंपरा को लोगों तक पहुंचा रहे उत्तर प्रदेश से सोनी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में इस वर्ष थीम स्टेट उत्तर प्रदेश से सोनी बनारसी साड़ी, सूट व फेबरिक लेकर पहुंचे हैं। सोनी पिछले 12 वर्षों से लगातार सूरजकुंड मेले में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं और हर बार बनारसी हथकरघा की समृद्ध परंपरा को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
सोनी ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से हस्तनिर्मित साड़ी और सूट बनाने के काम से जुड़ा हुआ है। यह हुनर उनके परिवार में विरासत के रूप में आगे बढ़ता आ रहा है। उनके चाचा मकबूल हसन को वर्ष 2001 में राष्ट्रपति केआर नारायणन की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मेले में सोनी ब्रोकेड, किमखाब, पैठानी सहित कई पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की बनारसी साड़ियां लेकर पहुंचे हैं। उन्हें मेले से अच्छी बिक्री की उम्मीद है। सोनी ने बताया कि उनके काम से 20 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिससे कई परिवारों की आजीविका चल रही है। सूरजकुंड मेला बनारसी हथकरघा को देश-विदेश में पहचान दिलाने का भी एक बड़ा मंच है।
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पानी के अंदर उगने वाले विशेष पत्तों से सामान तैयार करते हैं मेघालय के जरांगसू

मेले में थीम राज्य मेघालय से पहुंचे जरांगसू पहली बार अपनी पारंपरिक कला को दर्शकों के सामने लेकर आए हैं। जरांगसू पानी के अंदर उगने वाले विशेष पत्तों से सामान तैयार करते हैं, जो मेले में लोगों के बीच खास आकर्षण बने हुए हैं। जरांगसू वर्ष 2018 से इस पारंपरिक कार्य से जुड़े हुए हैं। वे मेले में लैंप, हेयर क्लिप, पानी की बोतल, बांस की लकड़ी से बने कुंडल, चाबी के छल्ले, टोकरी सहित कई तरह के आकर्षक और उपयोगी उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों को तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। एक उत्पाद को बनाने में लगभग एक दिन का समय लगता है, जबकि उसे पूरी तरह तैयार करने के लिए करीब तीन दिन धूप में सुखाया जाता है। जरांगसू के इस काम से लगभग 15 लोगों को रोजगार मिला हुआ है, सूरजकुंड मेला उनके लिए अपनी कला को देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा मंच साबित हो रहा है।
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