- बच्चों का स्वभाव चिड़चिड़ा होने और दैनिक दिनचर्या प्रभावित रहने पर डॉक्टर से काउंसलिंग करवाने की जरूरत
- पिता को जलाकर मारने का मामला, वारदात को अंजाम देने के बाद भाई के पास चला गया था किशोर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पल्ला थाना क्षेत्र में महज 14 साल का किशोर अपने पिता की आए दिन डांट व पिटाई करने की आदत से इतना गुस्सैल हो गया कि उसने पिता को जलाकर मार डाला। इतना ही नहीं, वारदात से पहले उसने पूरी प्लानिंग करते हुए सीढ़ियों से ऊपर जाने वाले गेट और पिता के कमरे का दरवाजा बंद कर दिया, ताकि उन्हें कोई बचा न सके। इस वारदात ने शहर के लोगों को झकझोर दिया है।
अमर उजाला टीम ने बुधवार को शहर के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. परमवीर सिंह से मामले को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अधिक समय बिताना हानिकारक है। सोशल मीडिया के लिए बार-बार टोकना और डांट लगाने से बच्चे मानसिक रोग का शिकार हो जाते हैं। उनका स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है और वे काफी गुस्सैल हो जाते हैं। इस प्रवृत्ति में वो ये भी नहीं देखते कि वे अपनों को ही नुकसान पहुंचाने की ठान लेते हैं।
इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर समय कम देने के लिए बच्चों को समझाए। बच्चों का स्क्रीन टाइम सेट करे। उनको बाहर मैदान में खेलने के लिए प्रेरित करें। वहां भी ध्यान रहे कोई गलत संगत में न पड़ें। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश करें। उनके फोन में चाइल्ड लॉक लगाकर रखें। इसके अलावा बच्चों के प्रतिदिन फोन पर बिताए समय और कंटेंट को देखे और गाइड करें।
वारदात के बाद पहुंचा था भाई के घर
पल्ला क्षेत्र में पिता मोहम्मद अलीम को जलाकर मारने के बाद 14 साल का किशोर खड्डा कॉलोनी में अपने बड़े भाई के घर चला गया। पुलिस ने छानबीन कर उसका पता लगाया और पकड़ा लिया। किशोर ने पुलिस को वारदात करने के पीछे का कारण बताया कि पिता आए दिन उसे डांटते-पीटते थे। इसी से तंग आकर उसने ये कदम उठाया। आरोप है कि उसके बड़े भाई ने भी इसी के चलते पिता का साथ छोड़कर अलग रहना शुरू किया था।
किशोर को भेजा बाल-सुधार गृह, फोरेंसिक सबूत जुटाए गए
वहीं, मामले में मंगलवार शाम को किशोर को पकड़ने के बाद कुछ पूछताछ की गई। इसके बाद मंगलवार शाम को ही पुलिस टीम ने उसे जेजे बोर्ड के समक्ष पेश किया। वहां से किशोर को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। मामले में एफएसएल टीम ने घटना स्थल से फोरेंसिक सबूत भी जुटाए हैं। साथ ही मौके पर सीन रिक्रिएट भी किया गया। जिससे घटनाक्रम के असल तथ्यों का पता लगे और केस का चालान तैयार करने में सुविधा हो सके।