जिला नागरिक अस्पताल में हर माह 50 मरीज पहुंच रहे ईएनटी विशेषज्ञ के पास, पुरुषों में समस्या अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नींद में खर्राटे लेना आम बात माना जाता है, लेकिन लगातार और तेज खर्राटे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकते हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हर महीने औसतन 50 पुरुष और महिलाएं इस समस्या को लेकर ईएनटी विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने की समस्या स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों में खर्राटे की अलग-अलग वजहें होती हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र, मोटापा, बड़े टॉन्सिल, टेढ़ी नाक की हड्डी, एलर्जी, सर्दी-जुकाम, शराब का सेवन और नींद की गोलियों का अधिक इस्तेमाल खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकता है। इसके अलावा पीठ के बल सोने वाले लोगों में भी खर्राटों की संभावना अधिक रहती है।
मुजेसर निवासी छोटेलाल ने बताया कि उन्हें लंबे समय से खर्राटे की समस्या है। परिवार के सदस्यों ने कई बार बताया कि सोते समय वह तेज खर्राटे लेते हैं। उन्होंने बताया कि सोते समय सांस रुकने से नींद टूट जाती है, जैसे नींद भी प्रभावित होती है। जांच कराने पर स्लीप एपनिया की पुष्टि हुई। वहीं, बल्लभगढ़ निवासी सीमा शर्मा ने बताया कि तेज खर्राटों के कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी और दिनभर थकान बनी रहती थी। उपचार के बाद अब उन्हें काफी राहत मिली है।
विशेषज्ञों ने बताया कि खर्राटे तब आते हैं जब नाक, मुंह या गले से हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। इस दौरान श्वसन मार्ग के ऊतक कंपन करने लगते हैं, जिससे कर्कश आवाज उत्पन्न होती है। कभी-कभार खर्राटे आना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह समस्या नियमित रूप से हो रही है और इसके साथ सांस रुकने की शिकायत भी है, तो यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) का संकेत हो सकता है।
लगातार और तेज खर्राटों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने, दिनभर थकान रहने या अत्यधिक नींद आने की शिकायत हो तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।-डॉ. रत्ना प्रिया, ईएनटी रोग विशेषज्ञ,जिला नागरिक अस्पताल