बल्लभगढ़ के अस्पताल की रिपोर्ट नहीं मान रहे जिला अस्पताल के डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बल्लभगढ़ निवासी 31 वर्षीय गर्भवती महिला सीमा शर्मा के गर्भ में छह माह के शिशु की मृत्यु होने के बाद उनका परिवार पिछले चार दिनों से इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहा है। महिला के पति उमेश शर्मा का आरोप है कि समय पर उपचार नहीं मिलने और बार-बार जांच कराने के कारण उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। फिलहाल महिला बीके नागरिक अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका उपचार चल रहा है।
उमेश शर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी छह माह की गर्भवती थीं। चार दिन पहले गर्भ में बच्चे की गतिविधियां महसूस होना बंद हो गईं। इसके बाद वह पत्नी को लेकर बल्लभगढ़ नागरिक अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में जांच नहीं हो सकी। इसके चलते उन्हें निजी जांच केंद्र से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। जांच रिपोर्ट में भ्रूण की मृत्यु होने की पुष्टि हुई।
उमेश का आरोप है कि 12 जून से वह लगातार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। इस दौरान कई अन्य जांचें भी कराई गईं, लेकिन उपचार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में 13 जून की रात उन्हें यह कहकर बीके नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया कि बल्लभगढ़ अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
बीके अस्पताल पहुंचने पर भी नहीं मिली राहत
परिजनों का आरोप है कि बीके नागरिक अस्पताल पहुंचने पर शुरुआत में महिला को भर्ती करने से मना कर दिया गया। बाद में भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन फिर से कई जांचें लिख दी गईं। उमेश का कहना है कि बल्लभगढ़ में कराई गई रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया जा रहा और दोबारा जांच कराने के लिए कहा जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा होने के बावजूद उन्हें बाहर से जांच कराने को कहा गया।
संक्रमण का खतरा, परिवार चिंतित
परिवार का कहना है कि गर्भ में मृत शिशु होने के कारण महिला की सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है। परिजनों का कहना है कि मृत भ्रूण लंबे समय तक गर्भ में रहने से संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण वे जल्द उपचार की मांग कर रहे हैं।
आर्थिक संकट भी बढ़ा
ऑटोरिक्शा चालक उमेश शर्मा ने बताया कि निजी जांचों और लगातार अस्पतालों के चक्कर लगाने में उनकी जमा पूंजी खर्च हो चुकी है। सीमा का यह दूसरा गर्भ था। पहला प्रसव सामान्य रहा था। उन्होंने कहा कि बार-बार नई जांचें कराने का खर्च उठाना अब उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
महिला का इलाज चल रहा है। आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे मामलों में बहुत सावधानी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार कदम उठाने पड़ते हैं। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के तहत मरीज को संपूर्ण उपचार दिया जा रहा है।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।