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खोरी गांव के लोगों पर दुकानदारों के पैसे फंसे

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फरीदाबाद। गांव खोरी में आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के साथ दुकानदार भी पिस रहे है। दुकानदारों का लोगों पर हजारों रुपये का बकाया है, लेकिन कोई देने के लिए तैयार नहीं। ऐसे में कई दुकानदारों ने पैसे मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी। इसमें सबसे ज्यादा दिल्ली लालकुंआ के दुकानदारों का पैसा डूबने की आशंका है।
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खोरी गांव में करीब 10 हजार परिवार रहते हैं। यहां सौ से अधिक छोटी-बड़ी किराना की दुकानें हैं। जिनसे लोग दैनिक सामानों की खरीदारी करते हैं। तोड़फोड़ से पहले अनेक दुकानदारों ने लोगों को हजारों रुपये का आटा, दाल, चावल, चीनी आदि उधार दे दिए। जिससे कोरोना महामारी में लोगों का काम चल सके। लॉकडाउन में अनेक लोगों की नौकरी चली गई। छोटे-मोटे काम धंधे भी चौपट हो गए। ऐसे में लोगों को इधर-उधर से पैसे ब्याज पर लेकर अपना जीवन यादव करना पड़ रहा है। वहीं पिछले माह सुप्रीम कोर्ट की ओर से तोड़फोड़ के आदेश आने के बाद लोग डरे और सहमे हुए है। बेरोजगार लोग अपने घरों को बचाने का रह प्रयत्न कर रहे हैं।
दुकानदारों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि न तो वह न तो लोगों से बकाया पैसे मांग सकते हैं और न डरा धमका सकते हैं। इस कारण दुकानदारों का लोगों पर लाखों रुपये का उधार हो गया है। दुकानदार एमडी असलम अख्तर ने कहा कि लोगों पर डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा का बकाया है। जब पैसे मांगते है तो वह कहते हैं अभी पैसे नहीं हैं। इस कारण दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। राहत अली ने कहा कि आसपास के सभी पड़ोसी है। पहले सभी पैसे दे देते थे। इस वजह से उधार दे दिए। अब उनके पैसे डूब गए है। पैसे के मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
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