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Faridabad News: आंगनबाड़ी केंद्रों में कर्मचारियों की भारी कमी, योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर

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बच्चों, गर्भवतियों और धात्री माताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा प्रभाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आंगनबाड़ी केंद्रों को स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव माना जाता है, लेकिन जिले की आंगनबाड़ियों में इस समय मानव संसाधन की भारी कमी देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर बच्चों, गर्भवतियों और धात्री माताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है।

जिले में कुल 1294 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, लेकिन इनमें से करीब 100 केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा सहायक कार्यकर्ताओं की संख्या भी बेहद कम है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिले में केवल 1086 सहायक कार्यकर्ता ही कार्यरत हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक है। कर्मचारियों की कमी के कारण पहले से कार्यरत स्टाफ पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ही कार्यकर्ता को कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, जिससे काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बच्चों के पोषण आहार वितरण, टीकाकरण की जानकारी, गर्भवतियों की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं।
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जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को पांच क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें बल्लभगढ़ ग्रामीण, बल्लभगढ़ जोन, फरीदाबाद ग्रामीण, फरीदाबाद शहरी, एनआईटी एक और एनआईटी दो क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। कई केंद्रों पर एक ही कार्यकर्ता को दो-दो केंद्रों का काम संभालना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित सेवाएं न मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं, तो योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
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रिक्त पदों के संबंध में विभाग को समय-समय पर अवगत कराया जाता है। विभाग ने आश्वस्त किया है कि पदों को जल्द ही भरा जाएगा। - मीनाक्षी चौधरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग
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