उच्चतम न्यायालय ने अरावली वन क्षेत्र में बसे लकड़पुर और खोरी गांव में अवैध रूप से बने घरों को तोड़ने के आदेश जारी किए है। न्यायालय ने साफ तौर पर कहा है कि वन क्षेत्र को अवैध निर्माणों से मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने जिला प्रशासन को छह हफ्ते का समय दिया है।
इससे लोगों में हड़कंप मच गया है। लोगों ने कहा कि तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले सरकार उन्हें दूसरी जगह मकान या जमीन व मुआवजा दे। उसके बाद ही उनके आशियाने को उजाड़ा जाए। लोगों का यह भी आरोप है कि एक तरह सरकार वर्ष 2023 तक सब को पक्का मकान देने की बात करती है। वहीं दूसरी तरह उनके मकानों को तोड़ जा रहा है। तोड़फोड़ की कार्रवाई से हजारों लोग बेघर हो जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय के आदेश पर लोगों ने कहा कि वह अपने घरों को खाली करने के लिए तैयार हैं लेकिन उससे पहले सरकार उनके रहने की व्यवस्था करें। उन्हें दूसरी जगह बसाया जाए। इसके साथ कॉलोनी में तोड़फोड़ के नाम पर लोगों से वसूली करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, जो तोड़फोड़ की बात कह कर हर महीने लोगों से उगाही करते हैं। स्थानीय लोगों ने निगम व अन्य विभागों पर शुरू में ही कार्रवाई नहीं करने पर भी सवाल उठाए हैं।
सूरजकुंड स्थित अरावली की पहाड़ियों में स्थित गांव खोरी में करीब 30 साल पहले लोगों की बसावट शुरू हुई। दिल्ली व फरीदाबाद सीमा में बसे लोगों ने बिल्डरों के झांसे में आकर यहां अपना आशियाना बनाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआत में बिल्डरों ने उन्हें बिजली पानी देने का आश्वासन दिया।