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संक्रमण काल में संवेदनाएं भी तोड़ रहीं दम

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फरीदाबाद (कैलाश गठवाल) । कोरोना संक्रमण से लोग ही नहीं बल्कि रिश्ते नातों में बसी संवेदनाएं भी दम तोड़ रही हैं। स्थिति यह है कि जिंदगी भर अपनों की परवाह करने वाले बुजुर्गों के अंतिम संस्कार में शामिल होने से भी परिवार के लोग कतरा रहे हैं। इस महामारी के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के दुख को कम करने में जुटे हैं। मई माह के बीते 18 दिनों में ऐसे कई मामले जिले में सामने आए हैं।
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रिश्तेदारों ने नहीं पड़ोसियों ने कराया अंतिम संस्कार
मेट्रो रोड स्थित फ्रंटियर कॉलोनी निवासी सोनम ने बताया कि उनके ससुर, सास, पति व देवर की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। मात्र एक सप्ताह के अंदर ही यह सब हुआ। उन्होंने बताया कि उनके ससुर महिपाल की 22 अप्रैल को मौत हुई। उसके चार दिन बाद उनकी सास भारती ने दम तोड़ दिया। अगले ही दिन सोनम के पति विपुल और उसके अगले दिन देवर तरुण चल बसे। कोरोना का नाम सुनते ही उनके रिश्तेदारों ने अपने फोन तक बंद कर लिए। स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रधान अजय अरोड़ा व अन्य पड़ोसियों ने अस्पताल का बिल भरा व शवों को श्मशान तक पहुंचाया और अंतिम संस्कार भी कराया। अब इस परिवार में सोनम अपने दो बेटों समर (7), प्रतीक (3) व देवरानी सोनिया के साथ रहती हैं। सोनम नौ माह की गर्भवती हैं। सोनम के देवर तरुण की शादी उसकी मौत से केवल 25 दिन पहले ही हुई थी। अभी तक इस परिवार का खर्च पड़ोसी उठा रहे हैं। रिश्तेदारों ने दुख की घड़ी में अब तक परिवार से संपर्क नहीं किया।
बुजुर्ग की मौत पर घर से चले गए परिजन
तिगांव रोड श्मशान घाट के संचालक लीलू पहलवान ने बताया कि 14 मई को उन्हें फोन के माध्यम से पता लगा कि आदर्श नगर में एक बुजुर्ग की कोरोना से मौत हो गई है। मृतक का परिवार उसके शव को छोड़कर घर से बाहर चला गया। लीलू अपनी टीम और शव वाहन को लेकर बुजुर्ग के घर पहुंचे और प्रथम तल से शव को उतारकर श्मशान लेकर आए। उन्होंने बताया कि शव के साथ परिवार का कोई सदस्य नहीं आया। पड़ोस के दो लोगों ने हिम्मत दिखाई और बुजुर्ग की अंत्येष्टि में शामिल हुए। लीलू ने बताया कि उन्होंने चार लोगों की टीम बनाई हुई है जो ऐसे लोगों की अंत्येष्टि कर रही है, जिनके परिजन मौत के बाद शव के साथ आने को तैयार नहीं है। उनके यहां करीब 70 शवों की अस्थियां रखी हैं, जिन्हें कोई लेने नही आ रहा।
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संक्रमण से पीड़ित एक भाई, दूसरे की मौत, नहीं पहुंचे करीबी
ओल्ड फरीदाबाद निवासी महेश पाराशर का कहना है कि उनके भाई की कोविड संक्रमण से मौत हो गई थी। बाकी परिवार भी बीमार था। उस समय रिश्तेदारों के साथ की उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, लेकिन कोई सामने नहीं आया। महेश ने श्मशान घाट संचालकों से संपर्क किया। उन्होंने कुछ अतिरिक्त पैसे लेकर उनके भाई का अंतिम संस्कार किया। आज तक कोई रिश्तेदार उनके यहां झांकने भी नहीं आया। संवाद
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