हिमाचली टोपी, हरियाणा के कपड़े के बैग व झारखंड की क्रॉकरी ने खींचा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा समर्थित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की स्टॉल दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार सहित विभिन्न राज्यों से आए समूहों ने मेले में अपने हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया है, जिससे ग्रामीण शिल्प को पहचान मिल रही है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन विभाग मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के निर्देशन में आयोजित मेले में नाबार्ड के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक मंच मिला है। इन स्टॉलों पर घर सजावट की वस्तुएं, हस्तनिर्मित वस्त्र, पारंपरिक आभूषण, प्राकृतिक रंगों से बने उत्पाद, क्रॉकरी, कपड़े के बैग और विविध हस्तशिल्प प्रदर्शित किए जा रहे हैं। हिमाचल की पारंपरिक टोपी, उत्तर प्रदेश व बिहार की सजावटी वस्तुएं, झारखंड के जनजातीय शिल्प और हरियाणा के कपड़े के बैग विशेष रूप से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
स्टॉल संचालकों के अनुसार सूरजकुंड मेला ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने का प्रभावी मंच है। स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उत्पादों की बिक्री के साथ पर्यटकों को उनके निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी भी दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। मेले में आए पर्यटक उत्पादों की गुणवत्ता और कारीगरी से प्रभावित दिखाई दे रहे हैं। नाबार्ड का उद्देश्य इन समूहों को बाजार उपलब्ध कराकर आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देना है।