जासूसी नेटवर्क के इनपुट के बाद हाई अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गाजियाबाद में पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा होने के बाद फरीदाबाद पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि दुश्मन देश के हैंडलर स्थानीय सीसीटीवी कैमरों के जरिये संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए डीसीपी क्राइम हिमाद्रि कौशिक के निर्देश पर शहर में लगे करीब 1200 सरकारी और हजारों निजी सीसीटीवी कैमरों का सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया गया है।
पुलिस का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कहीं किसी तीसरे पक्ष या बाहरी देश के पास इन कैमरों का लाइव एक्सेस तो नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, विशेष रूप से चाइनीज कंपनियों के कैमरों की सूची तैयार की जा रही है, क्योंकि तकनीकी रूप से इनके हैक होने या डेटा लीक होने की संभावना अधिक रहती है। गाजियाबाद के मामले में यह सामने आया था कि आरोपियों ने संवेदनशील स्थानों की फुटेज विदेशों में बैठे अपने आकाओं को भेजी थी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
शहर के सभी थाना और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में लगे कैमरों का भौतिक सत्यापन करें। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, मेट्रो स्टेशन, धार्मिक स्थलों और प्रमुख बाजारों में लगे कैमरों की दिशा और उनके सर्वर की सुरक्षा जांची जा रही है। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि रिकॉर्डिंग सुरक्षित सर्वर पर स्टोर हो रही है या नहीं।
फरीदाबाद में स्मार्ट सिटी योजना के तहत करीब 1200 कैमरे मुख्य चौराहों पर लगे हैं। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों और निजी संस्थानों में हजारों कैमरे संचालित हैं। पुलिस अब इन सभी का एक केंद्रीकृत डेटा तैयार कर रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन्हें सुरक्षित रूप से कंट्रोल रूम से जोड़ा जा सके। डीसीपी क्राइम ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान एहतियात के तौर पर चलाया जा रहा है ताकि फरीदाबाद का सुरक्षा घेरा पूरी तरह अभेद्य रहे और कोई भी बाहरी शक्ति हमारे डेटा में सेंध न लगा सके।