फरीदाबाद। शहरी क्षेत्रों में कोरोना से मरने वालों के दाह संस्कार के लिए दो हजार रुपये जबकि ग्रामीण सफाई कर्मियों को एक हजार रुपये दिए गए हैं। इसको लेकर ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन में रोष व्याप्त है। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार की बेरुखी से ग्रामीण सफाई कर्मचारी भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। शहरों और गांवों में अलग-अलग पैसे दिए जाना अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 18 मई तक कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं हुईं तो कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान देवीराम, जिला प्रधान दिनेश पाली व सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार सफाई कर्मियों को कोरोना योद्धा की उपाधि तो दे रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं ले रही। कोरोना महामारी में जब कोई भी व्यक्ति घर से बाहर निकलने के लिए तैयार नही है। उस वक्त सफाई कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर भी पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। गांवों में मरने वाले व्यक्तियों का दाह संस्कार ग्रामीण सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा कोरोना केंद्रों पर साफ-सफाई का कार्य, गांव को सैनिटाइज करने आदि का काम भी कर रहे हैं। लेकिन उन्हें पीपीई कीट, मास्क, दस्ताने आदि सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए जा रहे हैं। न ही कोई जोखिम भत्ता मिल रहा है और न ही बीमा किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सफाई कर्मी लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 20 फरवरी को उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व 24 फरवरी को पंचायत विभाग के महानिदेशक रमेशचंद्र बिढान के साथ हुई बैठकों में जिन मांगों पर सहमति बनी थी, उन्हें आज तक पूरा नहीं किया गया है। 4 अप्रैल को पंचकूला में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण सफाई कर्मचारियों के वेतन में 1500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। लेकिन 1 महीने से अधिक का समय व्यतीत हो गया, इस संबंध में कोई पत्र जारी नहीं किया गया है।