संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। भाई दूज के पर्व पर रोडवेज का चक्का जाम बहनों पर भारी पड़ गया। रोडवेज बस न चलने से बहने घंटों तक सड़कों पर ही भटकती रहीं। बहनों के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चे चौराहों पर खड़े होकर सवारियों का इंतजार करते रहे। हालात इतने खराब थे कि निजी वाहनों में भी जगह नहीं मिल रही थी। बसें खचाखच भरकर आ रही थीं। पुरुष व बच्चों को बसों की छतों पर बिठाया जा रहा था, जबकि महिलाओं को खचाखच भरी बसों में सफर करना पड़ा। निजी बस भी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में सार्थक साबित नहीं हो पा रही थी। यात्रियों को ऑटो व अवैध वाहनों में सफर करने पर मजबूर होना पड़ा।
अंबाला डिपो के चालक राजबीर सिंह की हत्या के विरोध में बुधवार को रोडवेज का चक्का जाम रहा है। रात 12 बजे से बस सेवा बंद कर दी गई। ऐसे में बुधवार को ही भाई दूज पर्व होने के चलते परेशानी दोगुनी हो गई। आम यात्रियों को तो परेशानी उठानी ही पड़ी, वहीं अपने भाइयाें के पास जाने वाली बहनों को घंटों सड़क पर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा। पलवल के बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर हालात बद से बदतर रहे। जैसे-तैसे ट्रेनों में सफर कर महिलाएं रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां से पैदल बस स्टैंड पर पहुंचने पर पता चला कि एक भी बस नहीं चल रही है। बस स्टैंड के बाहर आईं तो निजी बस यात्रियों से खचाखच भरी हुईं थी। ऑटो स्टैंड पर भी पांव रखने तक के लिए जगह नहीं थी। बस स्टैंड चौक पर यात्रियों को मेला सा लगा हुआ था। महिलाओं हाथों व सिर पर बैग रखे व बच्चों को साथ लेकर घंटों खड़ी रहीं। यात्रियों को निजी बसों, टैक्सी व ऑटो में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ा। इस दौरान टैक्सी चालकों ने यात्रियों ने मनमाना किराया वसूला। सभी चौराहों पर यात्री सवारियों को इंतजार करती नजर आए।
मायके देर से पहुंची महिलाएं
भाई दूज पर रोडवेज का चक्का जाम होने से महिलाएं अपने घर समय पर नहीं पहुंची। भाइयों से मिलने की आस में घर से भूखी-प्यासी घरों से निकली, परंतु बस न चलने के कारण घर समय पर नहीं पहुंची। भाई घरों पर अपने बहनों के इंतजार में व्रत कर बैठे रहे। देरी का कारण समय पर सवारियां न मिलना व निजी वाहनों द्वारा इधर-उधर छोड़ना रहा, जिससे बहनों को पैदल सफर करना पड़ा। एलिवेटेड पुल के ऊपर जाने वाली सवारियों ने यात्रियों को पुल के शुरू पर ही छोड़ दिया, जिससे यात्रियों को पैदल आगरा चौक तक जाना पड़ा। इसके अलावा ऑटो थोड़ी दूरी के यात्रियों नहीं बिठा रहे थे। ऑटो पलवल से सीधे बल्लभगढ़ या फिर होडल व कोसी की सवारियों को बिठा रहे थे, जिससे थोड़ी दूरी पर जाने वाली बहनों को काफी परेशानी हुई।
जान जोखिम में डालकर करना पड़ा सफर
सवारियों के कमी के चलते यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ा। बसों में यात्रियों को छतों पर बिठाया गया। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी बसों की छत पर चढ़ा दिया गया। बस के अलावा ऑटो व ईको वैन चालकों ने भी क्षमता से अधिक सवारियां भरकर अपने वाहनों को चलाया। घंटों इंतजार करने के बाद मजबूरी में यात्रियों को जो वाहन मिला उसी में सफर करना पड़ा।