संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बहन व भाई के स्नेह का प्रतीक भैया दूज का पर्व बुधवार को जिले में परंपरागत ढंग से मनाया गया। इसी के साथ ही दिवाली पर्व के तहत आने वाले पर्वों का समापन हो गया। भैया दूज पर बहनों ने भाइयों को टीका लगाया व उनकी लंबी आयु की कामना की। भैया दूज के कारण सड़कों पर जाम लगा रहा। इस बार हरियाणा परिवहन निगम की बसों का चक्का जाम होने के कारण बहनों को अपने भाइयों के यहां पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। परिवहन निगम की हड़ताल के चलते निजी वाहन, तिपहिया व निजी बस वालों ने खूब चांदी कूटी। बाजारों में भी चहल पहल रही। महिलाओं ने सूर्य को जल भी चढ़ाया।
भैया दूज पर बहनों में बहुत ही उत्साह देखने को मिला। वे सुबह जल्दी उठीं, साफ-सफाई करने के बाद उन्होंने भैया दूज पर्व की कहानी सुनी। अविवाहित बहनों ने घर पर ही भाइयों को टीका किया व मिठाई खिलाई। परमात्मा से उनकी लंबी आयु की कामना की। विवाहित बहनें अपनी ससुराल से मायके सुबह ही रवाना हो गईं। उन्होंने मायके पहुंचकर भाइयों व भतीजों को टीका किया व मिठाई खिलाई। भाइयों ने भी बहनों को उपहार दिए। महिलाओं ने दिवाली व गोवर्धन पूजा का सामान समेटा व पूजा सामग्री को सिला दिया।
पति भी गए साथ
पत्नियों के साथ आज उनके पतियों को भी ससुराल जाने का मौका मिला। जिन लोगों की ससुराल आसपास है वे अपने वाहनों से भी पत्नी के साथ भैया दूज दिलाने के लिए ससुराल गए। जहां उनकी काफी आवभगत होती देखी गई। ज्यादातर महिलाएं शाम तक अपने घरों को लौट आईं।
बाजार रहे गुलजार
बुधवार को भैयादूज होने के कारण बाजारों में भी खूब बिक्री हुई। गोला की बिक्री सबसे ज्यादा हुई। इसका कारण यह रहा कि बहनें अपने भाइयों को टीका करते समय मिठाई के साथ गोला भी देती हैं। इसके अलावा मिठाइयां व सूखे मेवों में बादाम व किशमिश भी खूब बिके। परंपरा के अनुसार बहने अपने भाइयों को पांच चने व पांच बताशा भी देती हैं। देहात में तो आज भी यही रिवाज है, परंतु आधुनिकता के आगोश में जकड़े शहर में अब चनों का स्थान काजू व बताशों का स्थान किशमिश ने ले लिया है। चने मजबूती के तथा बताशे स्नेह के प्रतीक माने जाते हैं।
बसें न चलने से हुई काफी परेशानी
भैया दूज पर यह पहला मौका था, जब हरियाणा निगम की बसें नहीं चली। बसों का चक्का जाम होने के कारण एक भी परिवहन निगम की बस सड़कों पर दिखाई नहीं दी। जिस कारण बहनों को अपने भाइयों के यहां पहुंचने में काफी परेशानी हुई तथा उन्हें निजी वाहनों व तिपहियों में यात्रा करनी पड़ी। निजी वाहन व तिपहियों में क्षमता से अधिक सवारियां होने के चलते बहनों को खासी परेशानी हुई्र।