पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यशैली पर सवाल, लोग टूटी सड़क पर सफर करने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। तिगांव पुल से मंझावली तक जाने वाले रास्ते की सड़क का निर्माण करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से हुआ। महज आठ महीनों में यह सड़क जगह-जगह से टूटकर ढेर हो गई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लोग टूटी सड़क पर सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जगह-जगह से टूटी सड़क व फुटपाथ गायब
पीडब्ल्यूडी विभाग की यह सड़क तिगांव मोड़, मंधावली मोड़ व रायपुर मोड़ पर सड़क पूरी तरह से टूटी हुई है व सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। नीमका से लेकर तिगांव तक इस सड़क के दोनों तरफ इंटरलॉकिंग टाइल लगाकर फुटपाथ बनाया जाना था। यह टाइलें रास्ते के दोनों ओर सही तरीके से नहीं लगी है और कहीं-कहीं से गायब भी हैं।
इस सड़क से जिले के करीब 30 गांव के रास्ते जुड़े हुए
जिले के करीब 30 गांव इस रास्ते से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सड़क टूटी होने के कारण ग्रामीणों का इस सड़क का प्रयोग करना बेहद मुश्किल हो गया है। इस सड़क के निर्माण में करीब तेरह करोड़ रुपये का खर्च पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से किया गया। महज आठ महीनों में ही यह सड़क ढेर हो गई।
घटिया सामग्री का आरोप
सड़क की गुणवत्ता को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग लगातार विभाग की कार्यशैली पर घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग के आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पूरी सड़क की निर्माण सामग्री की जांच होनी चाहिए व टूटी सड़क का जल्द समाधान होना चाहिए।
सड़क के टूटने की वजह महानगर विकास प्राधिकरण व स्वास्थ्य विभाग की शहरी व ग्रामीण जल आपूर्ति लाइन का क्षतिग्रस्त होना है। जैसे ही विभागों के द्वारा लाइनों की मरम्मत का कार्य पूरा हो जाएगा वैसे ही सड़कों को भी दुरुस्त करा दिया जाएगा। रास्ते के साइड में जहां पर भी टाइल्स लगाकर फुटपाथ का निर्माण होना था उसको जल्द पूरा करा दिया जाएगा। - प्रकाशलाल, कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी विभाग