40 किमी के सर्वे में तीन रेनीवेल के पानी में आर्सेनिक, मैंगनीज और आयरन की मात्रा अधिक मिली
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले के लाखों लोगों तक पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर पहली बार हुई व्यापक वैज्ञानिक जांच ने चिंता बढ़ा दी है। यमुना खादर के करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) और केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा कराए गए संयुक्त सर्वे में तीन प्रमुख रेनीवेल के पानी में आर्सेनिक, मैंगनीज और आयरन जैसे तत्वों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त पानी का सेवन त्वचा, लिवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।
मैंगनीज की अधिक मात्रा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है जबकि आयरन की अधिकता पानी के स्वाद, रंग और पाइपलाइन व्यवस्था पर असर डालती है। इस रिपोर्ट के बाद अब शहर की भविष्य की जलापूर्ति व्यवस्था, जल शोधन परियोजनाएं और भूजल संरक्षण की रणनीति नए सिरे से तैयार की जा रही है।
फरीदाबाद हरियाणा का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है। जिले की आबादी 22 लाख से अधिक हो चुकी है जबकि नगर निगम क्षेत्र में रहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तेजी से विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों, उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण शहर में प्रतिदिन करीब 320 से 340 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की जरूरत है। इसके मुकाबले विभिन्न स्रोतों से औसतन 250 से 270 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है। गर्मियों के दौरान मांग और आपूर्ति का अंतर और बढ़ जाता है जिससे कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बनती है।
शहर की प्यास बुझाते हैं 22 रेनीवेल और 160 से अधिक ट्यूबवेल
फरीदाबाद की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक भूजल पर आधारित है। यमुना खादर क्षेत्र में बने 22 रेनीवेल और शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थापित 160 से अधिक डीप ट्यूबवेल प्रतिदिन लगभग 120 एमएलडी पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा भाखड़ा नहर प्रणाली और अन्य स्रोतों से भी पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन भूजल पर लगातार बढ़ते दबाव ने अब इसकी गुणवत्ता पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। इसी को देखते हुए एफएमडीए और केंद्रीय भूजल बोर्ड के बीच समझौते के बाद यमुना किनारे करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया गया था। सर्वे के दौरान पानी के साथ-साथ मिट्टी के नमूनों की भी जांच की गई ताकि समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।
तीन रेनीवेल में सामने आई सबसे ज्यादा चिंता
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार रेनीवेल नंबर-5 में आर्सेनिक का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। रेनीवेल नंबर-20 में मैंगनीज और आयरन की मात्रा सामान्य सीमा से ऊपर दर्ज की गई जबकि रेनीवेल नंबर-22 में भी धात्विक तत्वों की अधिकता सामने आई। वैज्ञानिकों ने इन जल स्रोतों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार के लिए चिन्हित किया है।
इसलिए बिगड़ रही है भूजल की गुणवत्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि फरीदाबाद में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण लगातार बढ़ता भूजल दोहन है। शहर में हजारों निजी और सरकारी बोरवेलों से लगातार पानी निकाला जा रहा है जिससे जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। गहराई से निकलने वाले पानी में प्राकृतिक रूप से मौजूद आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य खनिजों की मात्रा अधिक हो सकती है। इसके अलावा तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण ने वर्षा जल के प्राकृतिक रिचार्ज को प्रभावित किया है। औद्योगिक विकास, शहरी विस्तार और बदलती भूगर्भीय परिस्थितियां भी भूजल गुणवत्ता पर असर डाल रही हैं। जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूजल दोहन की मौजूदा गति जारी रही तो आने वाले वर्षों में और अधिक जल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।
रिपोर्ट के आधार पर बदलेगी जल नीति
एफएमडीए अब इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित जल स्रोतों के लिए अलग-अलग उपचार योजना तैयार करेगा। पहले चरण में रेनीवेल नंबर-5, 20 और 22 के लिए 21.24 करोड़ रुपये की लागत से 30 एमएलडी क्षमता का आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसमें हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक के माध्यम से आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य हानिकारक तत्वों को हटाया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अन्य रैनी वेल की भी नियमित वैज्ञानिक निगरानी की जाएगी।
सिर्फ ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं सुलझेगी समस्या
जल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जल शोधन संयंत्र लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। भूजल दोहन पर नियंत्रण, वर्षा जल संचयन को प्रभावी बनाना, अवैध बोरवेलों पर कार्रवाई और यमुना खादर क्षेत्र की प्राकृतिक जल रिचार्ज क्षमता को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी होगा। यदि इन पहलुओं पर समानांतर काम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शहर के सामने पेयजल गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
एक-दो रेनीवेल के पानी में कुछ तत्व सामान्य स्तर से अधिक पाए गए थे लेकिन जब सभी रेनीवेल का पानी पाइपलाइन में एकत्रित होकर जाता है तो वह तत्व सामान्य हो जाते हैं। वहीं इस समस्या के समाधान के लिए आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। - अंकित भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता एफएमडीए