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Faridabad News: बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल को खतरा

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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक गर्मी के कारण दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है
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नीरज धर पाण्डेय

फरीदाबाद। मार्च महीने में तापमान में हो रही तेजी से बढ़ोतरी गेहूं की फसल के लिए चिंता का कारण बन रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक गर्मी के कारण दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों को समय रहते वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसल को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाने की जरूरत है।

भूपानी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक डॉ. विनोद मोहन ने कहा कि मार्च माह में बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यदि समय रहते उचित प्रबंधन न किया जाए तो दानों का विकास प्रभावित हो सकता है और पैदावार घट सकती है।
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पोटेशियम नाइट्रेट का करें छिड़काव

डॉ. विनोद मोहन के कहा कि यदि खेत का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए तो फसल को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का छिड़काव करना लाभकारी रहता है। इसके लिए 2 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव किया जा सकता है। पछेती बोई गई गेहूं की फसल में इसका छिड़काव 10 दिन के अंतराल पर दो बार करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।



सिंचाई प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान

उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान के दौरान खेत में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। किसानों को आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि फसल को गर्मी से राहत मिल सके। सिंचाई सुबह या शाम के समय करना अधिक उचित रहता है, जबकि तेज हवा के समय सिंचाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।



दुग्धावस्था में अधिक सतर्क रहने की जरूरत

डॉ. विनोद मोहन के कहा कि मार्च माह में गेहूं की दुग्धावस्था के दौरान अधिक तापमान फसल की उपज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। हालांकि समय पर सिंचाई, पोषक तत्वों के छिड़काव और खेत की नियमित निगरानी से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

तापमान में अचानक वृद्धि हुई है। किसान मौसम की स्थिति पर नजर रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें।-डॉ. विनोद मोहन, फसल वैज्ञानिक


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एनपीके (0:0:50) का छिड़काव
फसल में दानों के बेहतर भराव और गुणवत्ता के लिए एनपीके (0:0:50) का छिड़काव लाभकारी माना जाता है। इसे एक किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से लगभग 200 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव किया जा सकता है।
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2 प्रतिशत यूरिया घोल का प्रयोग

नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का छिड़काव किया जा सकता है। इसके लिए 4 किलोग्राम यूरिया को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करना उपयुक्त रहता है।



बोरॉन का संतुलित उपयोग

बोरॉन एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो दानों के भराव और गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर दाने हल्के रह सकते हैं।
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