थाना मालखाना हथियार चोरी के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-आठ थाना के मालखाना से 32 हथियार चोरी होने के मामले में पुलिस ने अदालत को बताया है कि चोरी की गई तीन पिस्तौल की बरामदगी अभी बाकी है। पुलिस ने यह जानकारी राजस्थान के खैरथल-तिजारा निवासी आरोपी केशव चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में दाखिल जवाब में दी, जिसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
फरीदाबाद के सेक्टर-आठ थाना मालखाना से 32 हथियार चोरी होने के मामले में पुलिस के पहले किए गए सभी हथियार बरामद होने के दावे पर अदालत में दाखिल जवाब ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र सिंह की अदालत में दाखिल पुलिस के जवाब के अनुसार चोरी की गई तीन पिस्तौल की बरामदगी अभी शेष है और उनकी बरामदगी के लिए आरोपी केशव चौधरी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
पुलिस के अनुसार थाना प्रभारी राजबीर सिंह ने मालखाने का निरीक्षण किया था। रिकॉर्ड के मिलान के दौरान शुरुआत में 13 पिस्तौल और रिवॉल्वर गायब मिले। जांच आगे बढ़ने पर कुल 32 हथियार चोरी की सूची तैयार कर अदालत में प्रस्तुत की गई। मामले की जांच के दौरान मालखाना प्रभारी ईएसआई बिजेंद्र सिंह से पूछताछ की गई, जिसके बाद वर्ष 2024-25 में थाना में अप्रेंटिस रहे मोनू का नाम सामने आया। इसके आधार पर करनेरा गांव निवासी मोनू, राजस्थान के खैरथल-तिजारा क्षेत्र के विपिन और संजय सुनारिया को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी संजय सुनारिया की निशानदेही पर राजस्थान के दाजनवाली गांव निवासी केशव चौधरी का नाम सामने आया। आरोप है कि केशव ने संजय से चोरी की गई तीन पिस्तौल 70-70 हजार रुपये में खरीदी थीं। पुलिस का कहना है कि इन तीन पिस्तौल की बरामदगी अभी शेष है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए केशव से पूछताछ आवश्यक है।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि केशव चौधरी का नाम प्राथमिकी में नहीं है और उसका नाम केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर जोड़ा गया है। यह भी कहा गया कि तीनों पिस्तौल पहले ही बरामद की जा चुकी हैं व उनका भुगतान किसी अन्य व्यक्ति ने किया था। इसलिए उसकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।
सरकारी पक्ष ने अदालत में कहा कि सरकारी हथियारों की चोरी और उनकी खरीद-फरोख्त अत्यंत गंभीर अपराध है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामले की जांच अभी जारी है व आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर केशव चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।