स्कूलों की 24 अक्तूबर को होने वाली पीटीएम में बच्चे दिखाएंगे सांझी कला का हुनर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में 24 अक्तूबर को होने वाली अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) इस बार बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने का भी मंच बनेगी। जिले के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए सांझी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके जरिये बच्चों को पारंपरिक कला से परिचित कराने के साथ अभिभावकों की स्कूल की गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। अब तक पीटीएम में पढ़ाई, बच्चों की प्रगति और उनकी समस्याओं पर चर्चा होती रही है। इस बार सांस्कृतिक गतिविधि को भी इसका हिस्सा बनाने की तैयारी है।
सांझी पारंपरिक लोककला है। इसमें अलग-अलग आकृतियों और सजावटी डिजाइनों के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति की जाती है। प्रतियोगिता में छोटे बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में भी जान सकेंगे। स्कूलों में इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रुचि और रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। पीटीएम के दौरान अभिभावक शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया के बारे में चर्चा कर सकेंगे। वहीं, सांझी प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा देखने का अवसर मिलेगा। इससे अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। स्कूल स्तर पर सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी इसे अहम माना जा रहा है।
केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहेगी बैठक
निपुण मिशन के जिला समन्वयक मनमोहन ने बताया कि पीटीएम का उद्देश्य केवल बच्चों के परीक्षा परिणामों पर चर्चा करना नहीं है। इसके जरिये अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद मजबूत करना भी जरूरी है। बच्चों के शुरुआती शैक्षणिक वर्षों में भाषा और गणित की पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। सांझी प्रतियोगिता इसी सोच के तहत आयोजित की जा रही है, ताकि बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिल सके।
पीटीएम में यह करेंगे बच्चे
बच्चे अपनी कल्पनाशीलता का उपयोग करके विभिन्न आकृतियों और सजावटी डिजाइनों के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति करेंगे।
वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानेंगे।
सांझी प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
गतिविधियों से बच्चों की रुचि और रचनात्मक क्षमता बढ़ेगी।
बच्चे अपनी मां या अभिभावक के साथ मिलकर सांझी बनाएंगे, जिससे पारंपरिक कला से जुड़ाव बढ़ेगा।