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Faridabad News: परिवहन सुविधा के नाम पर मनमानी वसूली कर रहे निजी स्कूल

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हर साल बढ़ाया जाता है बसों का किराया, अभिभावकों पर बढ़ रहा बोझ
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सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले के निजी स्कूल परिवहन सुविधा के नाम पर मनमानी वसूली कर रहे हैं। स्कूल बसों का किराया हर साल बढ़ाया जाता है। बढ़ी हुई फीस के चलते अभिभावक अब कैब जैसी सुविधाओं का सहारा लेने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल वालों ने इसके दाम तय कर रखे हैं। कम दूरी होने पर भी किराया कम नहीं होता है।

जिले के कई निजी स्कूलों ने बसों का किराया इस साल तीन से साढे तीन हजार रुपये तक कर दिया गया है। जबकि पिछले साल यह ढाई हजार रुपये तक था। इसमें छात्र के घर से स्कूल की दूरी भी नहीं देखी जा रही है। एक अभिभावक ने बताया कि उसकी बेटी का स्कूल घर से महज तीन किलोमीटर दूर है और उसकी बस किराया ढाई हजार रुपये महीना है।
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वहीं एक अन्य अभिभावक ने बताया कि उसकी बेटी को स्कूल छोड़ने वाला कोई नहीं है। इसलिए स्कूल बस लगवा रखी है। उन्होंने बताया कि घर से स्कूल की दूरी महज एक किलोमीटर है और उसकी बस का किराया दो हजार रुपये महीना है। यही हाल जिले के अन्य स्कूलों का है, जो कि अभिभावकों को परेशानी में डाल रहा है।

इसके अलावा कई स्कूल सीएनजी, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के नाम पर भी किराया बढ़ा देते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि पिछले दो साल में बस का किराया 1600 रुपये से बढ़कर 2300 रुपये तक पहुंच गया है। निजी स्कूलों की इस मनमानी पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है। अभिभावक इस खर्चे से बचने के लिए अब कैब का सहारा लेने लगे हैं।

रखरखाव और मरम्मत की लेते हैं फीस

निजी विद्यालयों के पास अभिभावकों से वसूली करने के कई तरीके हैं। स्कूल संचालक अभिभावकों से दाखिले के समय स्कूल के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर भी फीस लेते हैं। वहीं कई विद्यालय सुरक्षा राशि के नाम पर ढाई से तीन हजार रुपये लेते हैं। अधिकतर अभिभावकों को इसकी जानकारी नहीं होती है।
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अभिभावकों से बातचीत

स्कूल बसों का किराया काफी ज्यादा हो गया है। मैंने अपनी बेटी के लिए कैब लगवा रखी है, जिसका महीने का किराया 1800 रुपये है। - शुभम

बसों का किराया हर साल बढ़ाया जा रहा है, जबकि हमारी आय तो वही है। ऐसे में हमारे लिए यह खर्चा वहन करना मुश्किल हो रहा है।- करन

डीजल-पेट्रोल के दाम भी इतनी जल्दी नहीं बढ़ते हैं, जितनी जल्दी स्कूल की बसों का किराया बढ़ रहा है। प्रशासन को इसके लिए सख्त नियम बनाने चाहिए। -सुभाष

बस का किराया भी स्कूल फीस जितना हो गया है। बच्चे की सुरक्षा की चिंता रहती है। इसलिए बच्चे को अकेले स्कूल नहीं भेज सकते हैं। बसों से भेजना हमारी मजबूरी हो गई है। - सुरेंद्र गर्ग
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