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Faridabad News: दो जिलों में बंटा पृथला विधानसभा क्षेत्र, सरकारी काम कराना चुनौती से कम नहीं

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कई गांव ऐसे जहां यह भी स्पष्ट नहीं कि किस काम के लिए फरीदाबाद जाना है और किसके लिए पलवल
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उपमंडल की मांग पर टिकी उम्मीदें, जनगणना के बाद ही होगा फैसला

अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। पलवल और फरीदाबाद जिलों के बीच बंटा पृथला विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से प्रशासनिक असंतुलन और दूरी की समस्या से जूझ रहा है। करीब 100 से अधिक गांवों और लगभग तीन से साढ़े तीन लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में आम नागरिकों के लिए सरकारी काम किसी चुनौती से कम नहीं हैं। छोटे से छोटे कार्य, जैसे रजिस्ट्री, प्रमाण पत्र, लाइसेंस, राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन या पुलिस से जुड़ा मामला हर जरूरत के लिए लोगों को 30 से 40 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

पृथला विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है और कृषि यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके बावजूद किसानों को खाद, बीज, फसल नुकसान के मुआवजे और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी फाइलों के लिए फरीदाबाद या पलवल जाना पड़ता है। कई किसानों का कहना है कि कुछ देर का काम करवाने में पूरा दिन और कभी-कभी दो से तीन चक्कर लग जाते हैं, जिससे खेती और रोजगार दोनों प्रभावित होते हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं में भी दूरी की मार
क्षेत्र में किसी बड़े सरकारी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल का न होना भी गंभीर चिंता का विषय है। सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए तो लोग किसी तरह स्थानीय संसाधनों पर निर्भर रहते हैं लेकिन गंभीर स्थिति में मरीजों को फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल या दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। कई ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस मिलने और अस्पताल पहुंचने में इतना समय लग जाता है कि इलाज के अहम शुरुआती घंटे रास्ते में ही निकल जाते हैं।


कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पकड़ कमजोर
उपमंडल न होने का असर कानून-व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देता है। डीएसपी स्तर के अधिकारी का स्थायी कार्यालय क्षेत्र में नहीं है, जिससे कई मामलों में कार्रवाई में देरी होती है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित मौजूदगी न होने से लोगों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए बार-बार जिला मुख्यालयों का रुख करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पृथला की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह दो जिलों के बीच फंसा हुआ क्षेत्र बन गया है। एक ही विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासनिक काम अलग-अलग जिलों में बंटे होने से जनता सबसे ज्यादा परेशान है। कई गांव ऐसे हैं जहां यह भी स्पष्ट नहीं होता कि किस काम के लिए फरीदाबाद जाना है और किसके लिए पलवल।

उपमंडल बनने से मिलेगी राहत
स्थानीय स्तर पर उपमंडल की मांग इसलिए लगातार उठ रही है क्योंकि इससे प्रशासनिक ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है। यदि पृथला में एसडीएम कार्यालय स्थापित होता है तो तहसील, राजस्व विभाग, विकास खंड और अन्य जरूरी कार्यालय एक ही स्थान पर आ सकते हैं। इससे लोगों को दूरी से राहत मिलने के साथ कामों में पारदर्शिता और तेजी भी आएगी। उपमंडल घोषित होने पर क्षेत्र को अलग बजट मिलने की संभावना भी रहती है, जिससे सड़कों, बिजली, जलापूर्ति और सीवरेज जैसे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को गति मिल सकती है। इसके अलावा उपमंडल स्तर की अदालतें शुरू होने से छोटे दीवानी मामलों के लिए लोगों को शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।


विधानसभा में उठा मुद्दा, सरकार का पक्ष
पृथला को उपमंडल बनाने का मामला विधानसभा के बजट सत्र में उठा। सरकार की ओर से सदन में बताया गया कि 30 सितंबर 2025 को इस संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ था लेकिन फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में चल रही जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस विषय पर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सरकार संतुलित विकास की नीति पर काम कर रही है और किसी भी क्षेत्र की उपेक्षा नहीं की जा रही। उपमंडल जैसे निर्णय ठोस आंकड़ों और प्रशासनिक औचित्य के आधार पर ही लिए जाते हैं ताकि भविष्य में व्यवस्थाएं टिकाऊ और प्रभावी साबित हों।

जनता की नजरें फैसले पर
पृथला के ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक वादे से ज्यादा ठोस प्रशासनिक समाधान चाहते हैं। लोगों की मांग है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, आबादी और रोजमर्रा की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए उपमंडल पर गंभीरता से विचार किया जाए। फिलहाल पृथला की जनता जनगणना पूरी होने और उसके बाद आने वाले सरकारी फैसले का इंतजार करने के मजबूर है। उन्हें उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक दूरी और दोहरी व्यवस्था से जल्द राहत मिलेगी और क्षेत्र को उसका हक़ मिल सकेगा।
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इस मांग को हम पहले सेशन से उठा रहे हैं, लोगों की सुविधा के लिए पृथला को उपमंडल बनाने के लिए लगातार मजबूती से बात रखी जा रही है। मुख्यमंत्री को भी इस मामले से अवगत करवाया गया है। - रघुवीर तेवतिया, विधायक पृथला
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