कर्मचारियों की संख्या कम होने के चलते ड्यूटी और काम के घंटों पर पड़ रहा असर
भारती दुबे
फरीदाबाद।
बीके अस्पताल की प्रयोगशाला में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, इसके मुकाबले कर्मचारियों की संख्या कम है। प्रयोगशाला में करीब 16 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि काम के हिसाब से करीब 26 कर्मचारियों की जरूरत है। स्टाफ की कमी का असर कर्मचारियों की ड्यूटी और काम के घंटों पर भी पड़ रहा है।
सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक मरीजों की भीड़ रहती है। इसके बाद भी जांच के नमूनों और रिपोर्ट तैयार करने का काम पूरा करने के लिए कर्मचारियों को कई घंटे अतिरिक्त रुकना पड़ता है। कई कर्मचारी शाम पांच बजे के बाद ही काम खत्म कर घर लौट पाते हैं। अस्पताल की प्रयोगशाला में रोजाना दो हजार से अधिक मरीजों की टेस्टिंग की जाती है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक बड़ी संख्या में मरीज केएफटी, एलएफटी, सीबीसी, रक्त जांच समेत अन्य जांच कराने पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी के कारण काम का दबाव बना रहता है। इसके चलते ड्यूटी का निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी कर्मचारियों को जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट तैयार करने के लिए रुकना पड़ता है।
अगले दिन तक मिल जाती है रिपोर्ट
बीके अस्पताल की प्रयोगशाला में कई महत्वपूर्ण जांच की जाती हैं। अस्पताल में कराई जाने वाली जांच की रिपोर्ट अगले दिन तक मरीजों को उपलब्ध करा दी जाती है। लैब इंचार्ज अमित के अनुसार, कई ऐसी जांच भी अस्पताल में की जाती हैं, जिनके लिए निजी केंद्रों पर मरीजों को काफी अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में यही जांच बेहद कम शुल्क में उपलब्ध कराई जाती हैं।
अल्ट्रासाउंड सुविधा भी प्रभावित
बीके अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी स्टाफ की कमी और तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित है। अस्पताल में फिलहाल केवल गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है और यह सुविधा भी सप्ताह में केवल तीन दिन उपलब्ध रहती है। अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर निर्भर रहना पड़ता है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से नोटिस किया गया चस्पा
फिलहाल अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन भी करीब तीन दिनों से खराब पड़ी है। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर अस्पताल प्रबंधन की ओर से नोटिस चस्पा किया गया है। इसमें मशीन के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी होने की वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं होने की जानकारी दी गई है। मशीन खराब होने से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है और उन्हें निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
वर्जन-
अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने की सूचना एजेंसी को दे दी गई हैं। जल्द ही मशीन को ठीक कराया जाएगा, जिससे मरीजों को परेशानी न हो। - डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी