प्रोजेक्ट में वॉक-वे, साइकिल ट्रैक, पार्क, घाट, बोटिंग स्टेशन और मनोरंजन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी
विज्ञापन
राहुल राज
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में यमुना का किनारा अब शहर के नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) यमुना किनारे रिवर फ्रंट विकसित करने की तैयारी कर रहा है। अहमदाबाद के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट में वॉक-वे, साइकिल ट्रैक, पार्क, घाट, बोटिंग स्टेशन और मनोरंजन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। एफएमडीए इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित करेगा। रिवर फ्रंट शहरवासियों के लिए पर्यटन और मनोरंजन का नया केंद्र बनेगा। रिवर फ्रंट के बनने से फरीदाबाद के लोगों को मनोरंजन और पिकनिक के लिए दिल्ली और गुरुग्राम का रुख नहीं करना पड़ेगा। शहर में ही परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होगा। इससे स्थानीय पर्यटन और आसपास के कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
खूबसूरती के साथ यमुना संरक्षण भी होगा
एफएमडीए की योजना में रिवर फ्रंट को केवल सौंदर्यीकरण परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए यमुना के डूब क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने और नदी के आसपास हरित क्षेत्र विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इससे नदी किनारे अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हरित क्षेत्र बढ़ने से आसपास के वातावरण में भी सुधार होगा।
विज्ञापन
सीईटीपी से साफ होगा औद्योगिक पानी
रिवर फ्रंट परियोजना को सफल बनाने के लिए यमुना में गिरने वाले दूषित पानी को रोकना भी जरूरी है। इसी दिशा में यमुना एक्शन प्लान के तहत फरीदाबाद में 90 एमएलडी क्षमता के तीन कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) प्रस्तावित हैं। प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी, मिर्जापुर में 25 एमएलडी और बादशाहपुर में 15 एमएलडी क्षमता का प्लांट बनाया जाएगा। तीनों की अनुमानित लागत करीब 400 करोड़ रुपये है। पहले चरण में बादशाहपुर में 15 एमएलडी का सीईटीपी बनाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम की करीब छह एकड़ जमीन पर बने पुराने एसटीपी को हटाकर नया प्लांट बनाने की योजना है। जमीन नगर निगम उपलब्ध कराएगा, जबकि राशि एचएसआईआईडीसी की ओर से खर्च की जाएगी।
जिले में करीब 30 हजार उद्योग हैं। इनमें डाइंग, केमिकल और एल्युमीनियम समेत कई ऐसे उद्योग हैं, जहां रसायनों का इस्तेमाल होता है। इनसे 60 एमएलडी से अधिक दूषित पानी निकलता है। बादशाहपुर सीईटीपी में सबसे पहले डीएलएफ औद्योगिक क्षेत्र का पानी पहुंचाने की योजना है। इसके लिए आसपास के उद्योगों की संख्या और उनके डिस्चार्ज का आकलन किया जा रहा है। सीईटीपी से उपचारित पानी दोबारा उद्योगों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे आगरा नहर और यमुना में पहुंचने वाले प्रदूषित पानी में कमी आएगी। इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा और भूजल प्रदूषण का खतरा कम होगा।