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Faridabad News: पुराने वाहनों पर कार्रवाई से प्रदूषण पर वार की तैयारी

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शहर में 30 से 35 प्रतिशत प्रदूषण कम करने की रणनीति तैयार
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक इकाइयों और सड़कों की धूल से होने वाले प्रदूषण से जूझ रहे शहर के निवासियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। शहर में 30 से 35 प्रतिशत तक प्रदूषण कम करने के रोडमैप पर काम शुरू किया जा रहा है। प्रशासन ने शहर में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निगरानी बढ़ाने, खटारा वाहनों को हटाने और प्रमुख सड़कों को धूल मुक्त बनाने का एक व्यापक प्लान तैयार किया है। इससे आने वाले महीनों में प्रदूषण के स्तर में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

शहर में फिलहाल चार एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन ही सक्रिय हैं जिससे पूरे जिले का सटीक डाटा मिल पाना मुश्किल होता है। नई योजना के तहत फरीदाबाद में कम से कम 4 से 5 नए कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। इसके बाद इनकी संख्या बढ़कर लगभग 8 तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर के एनआईटी, बल्लभगढ़, सेक्टर-16 और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे अलग-अलग जोन में अलग-अलग प्रदूषण स्तर रहता है लेकिन सीमित स्टेशनों के कारण अभी तक हॉटस्पॉट की सटीक पहचान नहीं हो पाती है।
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फरीदाबाद में परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक करीब 2 से 2.5 लाख ऐसे वाहन हैं जो 10-15 साल पुराने हो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में डीजल ट्रक, बसें और ऑटो शामिल हैं। नई योजना के तहत इन वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने या रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई तेज की जाएगी। शहर में रोजाना करीब 6 से 7 लाख वाहनों की आवाजाही होती है जिनमें भारी वाहनों का दबाव एनएच-19 और केजीपी एक्सप्रेसवे से जुड़े इलाकों में ज्यादा रहता है। ऐसे में पुराने वाहनों को हटाना प्रदूषण कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पांच सड़कों को बनाया जाएगा डस्ट-फ्री मॉडल

प्रशासन ने शहर की कम से कम पांच व्यस्त सड़कों को मॉडल डस्ट-फ्री रोड बनाने की योजना तैयार की है। इनमें एनआईटी-1 से 5 लिंक रोड, सेक्टर-12-15 डिवाइडिंग रोड, बल्लभगढ़ मुख्य बाजार मार्ग, बीके चौक से ओल्ड फरीदाबाद रोड और सेक्टर-21-37 कनेक्टिविटी रोड जैसे मार्ग शामिल हो सकते हैं। इन सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से रोजाना सफाई, नियमित पानी का छिड़काव और किनारों पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। अनुमान है कि शहर में कुल पीएम 10 प्रदूषण का करीब 30-35 प्रतिशत हिस्सा केवल सड़क की धूल से आता है।
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ऑन-द-स्पॉट होगा चालान, सड़कों पर ही होगी जांच
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी। परिवहन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग संयुक्त अभियान चलाकर मुख्य चौराहों और हाईवे पर जांच करेंगे। आधुनिक सेंसर और कैमरों की मदद से वाहनों के धुएं की जांच कर तुरंत चालान किया जाएगा। साथ ही पीयूसी केंद्रों के डेटा को भी जोड़ा जा रहा है ताकि जिन वाहनों को प्रमाणपत्र नहीं मिला या जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं उनकी पहचान कर कार्रवाई की जा सके।

प्रदूषण के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जा रहा है। डस्ट फ्री सड़क की प्रक्रिया बजट बैठक के बाद शुरू कर दी गई है।- विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए
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