2031 की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाई जा रही मास्टर सीवरेज योजना को भी नई गति मिलेगी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की सबसे जटिल और वर्षों पुरानी समस्याओं में शामिल सीवरेज और जलभराव अब इतिहास बनने की ओर बढ़ रही है। नगर निगम फरीदाबाद से मास्टर सीवर नेटवर्क को फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) को सौंपने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत हस्तांतरण कार्य पूरा हो चुका है।
इस बदलाव के बाद शहर की मौजूदा सीवरेज व्यवस्था में सुधार होने के साथ वर्ष 2031 की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाई जा रही एफएमडीए की मास्टर सीवरेज योजना को भी नई गति मिलेगी। करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सीवरेज ढांचे और नए एसटीपी के जरिए फरीदाबाद को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब तक फरीदाबाद की सीवरेज व्यवस्था नगर निगम के अधीन थी लेकिन शहर के तेजी से फैलते दायरे और बढ़ती आबादी के कारण यह व्यवस्था लगातार दबाव में है। बरसात के मौसम में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और गंदे पानी का सड़कों पर आ जाना आम समस्या बन चुकी है। इन्ही सब समस्या को देखते हुए मास्टर सीवर नेटवर्क को एफएमडीए को सौंपने का फैसला लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार दस्तावेजी और तकनीकी स्तर पर अधिकांश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष औपचारिकताएं पूरी होते ही पूरे मास्टर सीवर नेटवर्क का संचालन और रखरखाव एफएमडीए के अधीन आ जाएगा। इससे सीवरेज से जुड़े बड़े फैसले एक ही एजेंसी के तहत लिए जा सकेंगे जिससे कामकाज में तालमेल और गति आएगी।
2031 की आबादी को ध्यान में रखकर नई योजना
एफएमडीए द्वारा तैयार की जा रही मास्टर सीवरेज योजना को वर्ष 2031 की अनुमानित आबादी के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले वर्षों में आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के बावजूद सीवरेज व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इस योजना के तहत पुराने और खराब सीवर लाइनों में सुधार, नई लाइनों का विस्तार और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जाएगा। साथ ही करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सहित समग्र सीवरेज ढांचा विकसित किया जाएगा जिससे गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो सकेगा।
डिसिल्टिंग से होगी पानी की निकासी
हस्तांतरण के साथ-साथ शहर की सीवर लाइनों की चरणबद्ध डिसिल्टिंग भी की जाएगी। वर्षों से कई इलाकों में सीवर लाइनों में गाद, कचरा और मलबा जमा हो चुका है, जिसके कारण पानी की निकासी बाधित होती है। बरसात में यही स्थिति जलभराव का कारण बनती है। डिसिल्टिंग के बाद सीवर लाइनों की वहन क्षमता बढ़ेगी और पानी तेजी से निकल सकेगा। इससे खासतौर पर पुराने सेक्टरों, निचले इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद
फरीदाबाद में जलभराव केवल असुविधा ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और यातायात से जुड़ी बड़ी समस्या भी रहा है। सड़कों पर भरा पानी दुर्घटनाओं का कारण बनता है और गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ता है। नई सीवरेज योजना के लागू होने से जलभराव की समस्या पर स्थायी नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब सीवरेज, ड्रेनेज और ट्रीटमेंट सिस्टम एकीकृत तरीके से काम करेंगे तब ही शहर को हर साल होने वाली बरसाती परेशानियों से निजात मिल सकेगी।
शहरवासियों को मिलेगा सीधा फायदा
मास्टर सीवर नेटवर्क के एफएमडीए को सौंपे जाने का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा। सीवर ओवरफ्लो की घटनाएं कम होंगी, सड़कों पर गंदा पानी नहीं फैलेगा और दुर्गंध व संक्रमण की समस्या से राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर सीवरेज व्यवस्था से डेंगू, मलेरिया और अन्य जल जनित बीमारियों के मामलों में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा, साफ-सुथरा शहर निवेश और विकास के लिहाज से भी बेहतर माहौल तैयार करेगा। मामले को लेकर एफएमडीए के चीफ इंजीनियर विशाल बंसल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।