औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन होता है प्रभावित, जेनरेटर से बढ़ जाता है खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बारिश शुरू होते ही नांगला गुजरान पार्ट-2, मुजेसर सहित शहर के कई अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ जाती है। उद्यमियों का कहना है कि बारिश के दौरान बिजली निगम की ओर से बार-बार बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। कई बार घंटों तक बिजली गुल रहने के कारण औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। बिजली नहीं होने पर उद्यमियों को मजबूरी में जेनरेटर चलाकर काम करना पड़ता है।
उद्यमियों के अनुसार औद्योगिक इकाइयों में मशीनें बिजली से संचालित होती हैं। अचानक बिजली जाने से मशीनों पर चल रहा काम रुक जाता है और श्रमिकों को भी इंतजार करना पड़ता है। लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने पर जेनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। इससे उत्पादन की लागत कई गुना बढ़ जाती है। उद्यमियों का कहना है कि सामान्य बिजली से जिस काम में करीब 100 रुपये खर्च होते हैं, उसी काम को जेनरेटर से करने पर करीब 250 रुपये का डीजल खर्च हो जाता है। यानी लागत ढाई गुना तक पहुंच जाती है।
बारिश के दौरान बिजली कटौती के साथ ही वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या भी सामने आती है। इससे मशीनों के खराब होने का खतरा बना रहता है। छोटे और मध्यम उद्योगों पर इसका अधिक असर पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि पहले से ही बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा के कारण उद्योगों पर दबाव है। ऐसे में बार-बार बिजली कटौती से उनका खर्च और बढ़ रहा है।
उद्यमियों ने बिजली निगम से मांग की है कि बारिश के मौसम में औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर किया जाए। बार-बार होने वाली कटौती की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उद्योगों का काम प्रभावित न हो।
उद्यमियों से बातचीत
बारिश के दौरान कई बार घंटों बिजली चली जाती है। मशीनें बंद होने से उत्पादन रुक जाता है और मजबूरी में जेनरेटर चलाना पड़ता है। इससे बिजली की तुलना में लागत ढाई गुना तक बढ़ जाती है। - वेद शर्मा, उद्यमी
बिजली कटौती से समय और उत्पादन दोनों का नुकसान होता है। बिजली निगम को बारिश के दौरान फाल्ट और कटौती की समस्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बिना लाइट के पूरी तरह से नहीं हो पाता है।-पवन, उद्यमी