अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी वासियों को जहरीली हवा से निजात नहीं मिल रही है। बृहस्पतिवार को हवा खतरनाक श्रेणी में पहुंचाने के साथ ही पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) 2.5 और पीएम10 का स्तर 500 पहुंच गया। हवा में मौजूद खतरनाक रासायनिक गैस और धूल के सूक्ष्म कण लोगों को बीमार कर रहे हैं। वातावरण में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड समेत अन्य गैसों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंचने से लोगों को श्वास रोग, दमा व फेफड़े के कैंसर जैसे खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
दिवाली के बाद शहर की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। हवा में पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) का स्तर 500, सल्फर डाई ऑक्साइड 13 और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 17 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिले, कार्बन डाइऑक्साइड 75, ओजोन का स्तर 57 दर्ज किया गया है। यह तय मानकों के बेहद गंभीर है। वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का यह पैमाना 50 से 60 फीसदी अधिक होता है। एनआईटी 3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीन मलिक ने कहा कि दिवाली के बाद सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, आंख और नाक से पानी आना जैसे शिकायतें बढ़ी है।
दीवाली के पहले ऐसे मरीजों की संख्या रोजाना 10 से 15 थी। अब बढ़कर 25 से 30 हो गई है। अधिकांश लोगों को सांस लेने के दौरान सीने में दर्द, व घबराहट की शिकायत मिल रही है, जो कि दमा का प्रारंभिक लक्षण है।
डॉक्टरों से बातचीत
धूल के सूक्ष्म कणों को पीएम 10- पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। यह नग्न आंखों से बिल्कुल दिखाई नहीं देते हैं। श्वसन क्रिया के दौरान ऑक्सीजन के साथ यह फेफड़ों तक पहुंचते है। ऑक्सीजन बाहर छोड़ते समय कुछ बाहर निकल जाते हैं तो और कुछ भीतर ही रह जाते हैं। इसकी मात्रा अधिक होने पर यह फेफड़ों को संक्रमित कर देती है, समय पर उपचार नहीं कराया गया तो यह कैंसर का रूप ले लेती है। - डॉ. प्रवीन मेंहदीदत्ता, कैंसर रोग विशेषज्ञ
प्रदूषित हवा में मौजूद जहरीले कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं और रक्त में मिलकर ह्दय और कैंसर सहित गंभीर बीमारियों को बढ़ाते हैं। शोध के अनुसार 7 से 10 साल तक लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने से लंग (फेफड़ों) कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। - डॉ. संजय कुमार, कैंसर विभाग प्रमुख, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
धनंजय