पेड़ों पर जमी धूल की मोटी परत, लोगों को सांस संबंधी दिक्कते बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले की हवा में प्रदूषण का असर साफ दिखने लगा है। शहर के कई इलाकों में धूल की मोटी परत न सिर्फ पेड़-पौधों को ढक रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं। अस्पतालों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।
शहर की सड़कों पर उड़ती धूल और वाहनों के धुएं ने वायु गुणवत्ता को और खराब कर दिया है। सड़क किनारे लगे पेड़ों की पत्तियां धूल की चादर से ढंकी हुई हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि पेड़-पौधों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों में हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई जा रही है। रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, बल्लभगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 दर्ज किया गया, जबकि फरीदाबाद का एक्यूआई 214 रहा। एनआईटी क्षेत्र में यह स्तर 230, सेक्टर-11 में 250 और सेक्टर-30 में 163 दर्ज किया गया।
बीके अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहित अग्रवाल का कहना है कि आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिख रहा है। हवा में मौजूद धूल के कण और प्रदूषक तत्व धीरे-धीरे लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आम लोगों ने भी शिकायत की है कि सुबह-शाम सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं।