फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: 20 साल बाद भी नहीं मिला इलेक्ट्रोप्लेटिंग जोन में प्लॉट

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

फरीदाबाद। शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए रिहायशी क्षेत्रों में चल रही इलेक्ट्रोप्लेटिंग कंपनियों को हटाकर सैक्टर-58 में स्थापित किए जाने के लिए 2002-03 में पॉलिसी बनाई गई। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यहां प्लॉटों का आवंटन किया जा रहा था। इसमें लघु उद्यम वाले 200, 400 वर्ग गज के प्लॉट थे। आवेदनकर्ता को प्रदूषण विभाग, फरीदाबाद स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एवं प्रदूषण नियंत्रण कोऑपरेटिव सोसाइटी से अनुमति लेना अनिवार्य था।
विज्ञापन

सेक्टर-29 निवासी राजेन्द्र सिंह ने जिला परिवार एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष इस मामले को रखते हुए कहा कि 10 प्रतिशत अग्रिम राशि के साथ एक लाख 25 हजार रुपये भी जमा कराए थे। सेक्टर-58 इलेक्ट्रोप्लेटिंग जोन में सीईटीपी के निर्माण में भी आवेदनकर्ताओं ने सहयोग किया था। बावजूद, इसके आवेदनकर्ताओं को आज तक प्लॉट नहीं मिले हैं। इलेक्ट्रोप्लेटिंग का काम करने वाले 52 ऐसे लोग हैं, जिन्होंने आवेदन किया था। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ये लोग अब रिहायशी क्षेत्र या अनाधिकृत क्षेत्र में काम नहीं कर सकते। औद्योगिक क्षेत्र में बड़े प्लॉट लेकर काम करने की इनकी स्थिति नहीं है। ऐसे में इन परिवारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस संबंध में आवेदनकर्ताओं ने कई बार संबंधित विभागों में जाकर एवं पत्राचार के माध्यम से संपर्क भी किया है, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने शिकायत सुनने के बाद इलेक्ट्रोप्लेटिंग का काम करने वाले आवेदनकर्ताओं को स्पष्ट किया कि आवेदन करने का मतलब यह नहीं कि आपको प्लॉट मिल ही जाए। हरियाणा में बनाई गई नीति के अनुसार किसी भी प्रकार के इंडस्टि्रयल एवं कॉमर्शियल मामलों में एचएसआईआईडीसी डील करता है, जबकि रिहायशी प्लॉटों के मामले में एचएसवीपी। आवेदनकर्ताओं ने एचएसवीपी के माध्यम से आवेदन किया था। ऐसे में उनको दोबारा से एचएसआईआईडीसी के माध्यम से आवेदन करना होगा। उन्होंने पुराने आवेदनकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात भी अधिकारियों से कही।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें