हादसे में छह बच्चे घायल, तीन बच्चों के सिर में चोट लगी
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बल्लभगढ़। पंजाबी मोहल्ले में ट्यूशन पढ़ रहे बच्चों के ऊपर लिंटर का प्लास्टर गिर गया। हादसे में छह बच्चे घायल हो गए। इनमें तीन बच्चों के सिर में चोट लगी है। हादसे के बाद बच्चों में भगदड़ मच गई। परिजन भी मौके पर पहुंच गए और घायल बच्चों को उपचार दिलाया गया।
हादसे के समय आंगन में 12 से ज्यादा बच्चे ट्यूशन पढ़ रहे थे। घायल रजनीश ने बताया कि वह तीसरी कक्षा में पढ़ता है। हादसे के समय जसवंत, विपिन समेत कई बच्चे वहां मौजूद थे। अचानक ऊपर से लिंटर का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से कई बच्चों को चोट लगी। प्लास्टर गिरते ही बच्चे डरकर इधर-उधर भागने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए। संकरी गली होने के कारण बच्चों को बाहर निकालने और उन्हें उपचार के लिए ले जाने में भी परेशानी हुई। परिजनों का कहना था कि बच्चों के पढ़ने के दौरान अचानक छत का प्लास्टर गिरना गंभीर लापरवाही जैसी स्थिति है। गनीमत रही कि बड़ा हिस्सा बच्चों के ऊपर नहीं गिरा। मकान मालिक अशोक कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी मंजू बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। घटना के समय 12 से अधिक बच्चे आंगन में पढ़ रहे थे। अचानक लिंटर का प्लास्टर गिर गया। उन्हें पहले से भवन की ऐसी स्थिति का अंदेशा नहीं था।
दिल्ली हादसे के बाद जर्जर भवनों पर नजर
पंजाबी मोहल्ले की यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली में इमारत गिरने के हादसे के बाद फरीदाबाद में भी जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर प्रशासन सक्रिय हुआ है। नगर निगम की ओर से कमजोर भवनों का सर्वे और निरीक्षण तेज किया गया है। एनआईटी जोन में अब तक 22 ऐसे भवन चिन्हित किए गए हैं, जिनकी स्थिति की जांच जरूरी मानी गई है। एनआईटी-1 मार्केट में निरीक्षण के दौरान एक पुरानी इमारत की दीवारों में दरारें और जर्जर छज्जा भी सामने आया है। भवन में अभी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। सेक्टर-16 स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय कॉलेज की पुरानी इमारत भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। इस भवन को वर्ष 2016 में कंडम घोषित किया गया था। इसके बावजूद नई इमारत का काम पूरी तरह पूरा नहीं होने के कारण विद्यार्थी अभी पुराने भवन में ही पढ़ रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार नई इमारत का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और बाकी काम पूरा होते ही विद्यार्थियों को वहां शिफ्ट किया जाएगा। विद्यार्थियों का कहना है कि पुराने भवन में कई जगह प्लास्टर गिरने का डर बना रहता है।
33 कोचिंग सेंटरों के पास फायर एनओसी नहीं
शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अग्निशमन विभाग की जांच में 33 कोचिंग सेंटर ऐसे भी मिले हैं, जिनके पास फायर एनओसी नहीं थी। हालांकि इन स्थानों पर अग्निशमन उपकरण मौजूद मिले। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी वाले इन केंद्रों में आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था अहम है। पाली गांव में भी ग्रामीणों ने पुराने भवन की कमजोर स्थिति को लेकर प्रशासन से तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन के ऊपर भारी टावर लगा है और जनरेटर चलने के दौरान कंपन महसूस होता है। उन्होंने विशेषज्ञों की टीम भेजकर भवन की संरचनात्मक जांच कराने की मांग की है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि पंजाबी मोहल्ले में हुए हादसे के बारे में पुलिस को अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।