मास्टर प्लान-2031ः एचएसवीपी को जमीन देने के मूड में किसान नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद के विस्तार की योजना को बड़ा झटका लगा है। मास्टर प्लान-2031 के तहत प्रस्तावित 12 नए सेक्टरों को विकसित करने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) करीब 4,500 एकड़ जमीन नहीं जुटा सका है। बिल्डरों की वजह से जमीन के ज्यादा दाम बढ़ने के कारण किसान एचएसवीपी को जमीन देने के मूड में नहीं हैं। पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ठप होने से इन सेक्टरों को विकसित करने की योजना को सिरे चढ़ाने में दिक्कत आ रही है। इससे ग्रेटर फरीदाबाद में नए रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने की योजना पर भी विराम लग गया है। गौरतलब है कि बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार को देखते हुए एचएसवीपी ने 12 नए सेक्टर विकसित करने की योजना तैयार की थी। प्रस्तावित सेक्टरों में 94ए, 96, 96ए, 97ए, 99, 100, 101, 102, 103, 140, 141 और 142 शामिल हैं। इन सेक्टरों के लिए 19 गांवों की जमीन ली जानी थी। हालांकि, जमीन मालिकों और प्राधिकरण के बीच मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते जमीन जुटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
रिहायशी के साथ व्यावसायिक और संस्थागत विकास का था प्रस्ताव
इन 12 सेक्टरों में अलग-अलग जरूरतों के अनुसार विकास की योजना बनाई गई थी। सेक्टर-100 को व्यावसायिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना था। वहीं सेक्टर-96ए और 97ए में पब्लिक और सेमी पब्लिक सुविधाओं के लिए जमीन प्रस्तावित थी। यहां सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान और अस्पताल जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती थीं। बाकी सेक्टरों में मुख्य रूप से रिहायशी विकास प्रस्तावित था।
बल्लभगढ़ क्षेत्र में भी बनने थे तीन सेक्टर
प्रस्तावित सेक्टर-140, 141 और 142 बल्लभगढ़ क्षेत्र की तरफ विकसित किए जाने थे। इनके लिए सोतई, सुनपेड़, साहूपुरा, मलेरना और जाजरू समेत आसपास के गांवों की जमीन ली जानी थी। इन सेक्टरों का विकास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे लिंक रोड और जेवर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित इंटरचेंज के आसपास होना था। बाकी नए सेक्टर तिगांव क्षेत्र में प्रस्तावित थे।
पहले प्रयास में नहीं बनी किसानों से बात
एचएसवीपी ने पहले भी करीब 4500 एकड़ जमीन जुटाने की कोशिश की थी, लेकिन किसानों की ओर से पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई गई। जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियां सामने आईं। इसके बाद प्राधिकरण ने ई-भूमि पोर्टल के जरिये स्वेच्छा से जमीन देने वाले किसानों से आवेदन मांगे।
जमीन मालिकों को पोर्टल पर अपनी जमीन का विवरण अपलोड करने के लिए समय दिया गया था। इसके बावजूद अपेक्षित जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इस कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
- संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी