रिहायशी इलाके में वन्य जीवों के आने की घटनाओं में आएगी कमी
अरावली के रिचार्ज होने पर बढ़ेगा भू-जल स्तर
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। गर्मियों की तपिश बढ़ने से पहले अरावली के जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए राहत भरी तैयारी शुरू हो गई है। हरियाणा वन्यजीव विभाग ने फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों में पानी की स्थायी व्यवस्था के लिए दो चरणों वाली बड़ी योजना पर काम तेज कर दिया है।
इसके तहत चार नए पक्के तालाब बनाए जाएंगे जबकि फरीदाबाद–गुरुग्राम रोड के आसपास मौजूद पुराने कच्चे सरोवरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे जंगल के अंदर पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों में आने की घटनाओं में भी कमी आएगी। अरावली की पथरीली पहाड़ियों में हर साल अप्रैल और मई आते-आते पानी की भारी कमी हो जाती है। तेंदुआ, नीलगाय, हिरण, सियार और जंगली सूअर जैसे जानवर पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं। कई बार ये जानवर खेतों, कॉलोनियों और मुख्य सड़कों तक पहुंच जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। इसी समस्या को देखते हुए वन्यजीव विभाग ने चार रणनीतिक जगहों पर पक्के तालाब बनाने का फैसला किया है। ये तालाब उन रास्तों के पास बनाए जाएंगे जहां से वन्यजीव अक्सर गुजरते हैं। इससे जानवरों को पानी के लिए दूर भटकना नहीं पड़ेगा। इन तालाबों को इस तरह बनाया जाएगा कि पानी रिसकर जल्दी खत्म न हो और बरसात का पानी लंबे समय तक जमा रह सके। साथ ही आसपास के क्षेत्र में मिट्टी संरक्षण और पौधारोपण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सूखे सरोवरों को मिलेगा नया जीवन
योजना का दूसरा और अहम हिस्सा फरीदाबाद–गुरुग्राम रोड के किनारे स्थित पुराने कच्चे तालाबों का पुनरुद्धार है। वर्षों से देखरेख के अभाव, गाद जमने और आसपास बढ़ते अतिक्रमण के कारण ये सरोवर लगभग सूख चुके हैं। अब विभाग इन तालाबों की सफाई करेगा, गहरी खुदाई करेगा और इनके तटबंधों को मजबूत करेगा। आसपास उगी झाड़ियों को व्यवस्थित किया जाएगा ताकि पानी का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे। अगर ये सरोवर सही तरीके से पुनर्जीवित किए गए तो मानसून के बाद कई महीनों तक इनमें पानी ठहर सकेगा। इससे वन्यजीवों को फायदा होने के साथ आसपास के गांवों और खेतों का भू-जल स्तर भी सुधरेगा।
अभी गंभीर हो चुका है अरावली का भू-जल स्तर
अरावली में भूजल स्तर लगातार नीचे खिसक रहा है कई हिस्सों में यह 600 - 700 फीट तक जा चुका है जबकि कुछ स्थानों पर 1 हजार फीट से भी अधिक गहरा हो गया है। फरीदाबाद पहले ही भूजल की दृष्टि से डार्क जोन में है। पिछले दो दशकों में अरावली के 120 से ज्यादा प्राकृतिक जलस्रोत सूख चुके हैं जिसमें पुराने तालाब, झरने और मौसमी सरोवर शामिल हैं। अरावली की चट्टानों में प्रति हेक्टेयर करीब 20 लाख लीटर जल रिचार्ज की क्षमता मानी जाती है। वन क्षेत्र कम रह जाने से हरियाली और जल-संरक्षण दोनों प्रभावित हुए हैं। ऐसे में चार नए पक्के तालाब और पुराने सरोवरों का पुनर्जीवन अरावली के लिए जरूरी जीवनरेखा माने जा रहे हैं।
रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे जानवर
पिछले कुछ वर्षों में फरीदाबाद और गुरुग्राम से सटे अरावली क्षेत्र में तेंदुआ देखे जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। कई बार ये जानवर पानी और भोजन की तलाश में जंगल से बाहर आ जाते हैं। कुछ महीने पहले ही एक तेंदुए की सड़क हादसे में मौत हो गई थी जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चिंता पैदा कर दी थी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जंगल के भीतर पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा तो जानवर अपने प्राकृतिक आवास में ही रहेंगे। इससे इंसानी बस्तियों के लिए खतरा कम होगा और वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे।
अरावली के गिरते जलस्तर को मिलेगा सहारा
यह योजना केवल वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। तालाबों में जमा पानी धीरे-धीरे जमीन के भीतर रिसेगा, जिससे अरावली का गिरता भू-जल स्तर सुधरेगा। इससे आसपास की वनस्पति, घास के मैदान और छोटे प्राकृतिक जलस्रोत फिर से जीवित हो सकते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली दिल्ली–एनसीआर की प्राकृतिक ढाल है। यहां पानी के स्रोत मजबूत होंगे तो पूरे क्षेत्र की जलवायु और जैव-विविधता पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हरियाली बढ़ेगी, मिट्टी का कटाव रुकेगा और तापमान भी संतुलित रहेगा।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में उम्मीद
अरावली के आसपास बसे गांवों और कॉलोनियों के लोग भी इस पहल को सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जंगल में पानी रहेगा तो गर्मियों में जल संकट कम होगा और भू-जल स्तर में सुधार आएगा। कई स्थानीय पर्यावरण समूहों ने भी इस योजना का स्वागत किया है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर ऐसे और तालाब बनाए जाएं और उनकी नियमित निगरानी की जाए तो अरावली को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने विभाग से अपील की है कि योजना को समय पर पूरा किया जाए और इसमें स्थानीय समुदायों को भी जोड़ा जाए।
वर्जन
वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लगातार इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं, जल्द ही इस दिशा में अन्य भी कई कार्य किए जाएंगे। - सुरेंद्र ढांगी, डीएफओ फरीदाबाद