इस हुक्के का कश कभी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल तक लगा चुके हैं। फिलहाल इसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संग्रहालय में संजो कर रखा गया है। इसे मेला परिसर में बनाए जाने वाले हरियाणा के ‘अपना घर’ में लाया जाएगा। यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
सूरजकुंड मेले में सैलानियों को 100 साल पुराने हुक्के का भी दीदार होगा। इस हुक्के का कश कभी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल तक लगा चुके हैं। फिलहाल इसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संग्रहालय में संजो कर रखा गया है। इसे मेला परिसर में बनाए जाने वाले हरियाणा के ‘अपना घर’ में लाया जाएगा। यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
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पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह हुक्का करीब 100 साल पुराना है। आजादी के समय भी इसका इस्तेमाल खाप पंचायतों व आजादी की लड़ाई के लिए योजना बनाने के दौरान किया जाता था। आजादी के समय इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब व राजस्थान आदि के क्षेत्रों में बैलगाड़ी से गंतव्य तक पहुंचाया जाता था। इसकी ऊंचाई 4.6 व चौड़ाई 1.6 फीट है। यह पीतल, तांबे और लोहे से बना है।
इसका वजन 65 किलो है। इसके पेंदे में एक बार में 34 लीटर तक पानी भरा जाता था, जबकि इसके चिलम के भीतर में एक बार में एक किलो से ज्यादा तंबाकू भरा जाता। सूरजकुंड मेले के नोडल अधिकारी राजेश जून का कहना है कि मेले में इस बार भी सैलानियों को काफी कुछ देखने को मिलेगा।