बल्लभगढ़। बरसात का मौसम किसानों के लिए राहत भरा होता है। अच्छी बरसात किसान के चेहरे पर चमक ला देती है। लेकिन कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां घने बादल देखते ही ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ जाती हैं। ग्रामीण बरसात तो चाहते हैं लेकिन ज्यादा बरसात नहीं। कारण है उनका यमुना के किनारे पर बसा होना।
हर साल बरसात के दिनों में यमुना का जलस्तर बढ़ जाता है। दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए ओखला बैराज और हथिनी कुंड बैराज से पानी को छोड़ दिया जाता है। इससे समस्या और बढ़ जाती है। यमुना का बढ़ता जलस्तर किसानों की फसल तो बर्बाद करता ही है, साथ ही उनके घरों तक में घुस जाता है। इस बार भी मौसम विभाग के अनुसार अच्छी बरसात होने के आसार है। इन खबरों ने गांव के लोगों में चिंता बढ़ा दी है। अमीपुर गांव के सरपंच वेदपाल भाटी बताते हैं कि गांव यमुना के किनारे पर बसा होने के कारण हर साल ग्रामीणों को बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ता है। फिलहाल तो यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। यदि लगातार बरसात हुई तो इस बार भी भारी नुकसान होगा। गांव कबूलपुर निवासी किसान जयकिशन बताते हैं कि यमुना में जलस्तर बढ़ने से हर साल फसल बर्बाद हो जाती है। सरकार की ओर से समय पर मुआवजा भी नहीं मिल पाता है। कई दिनों तक पानी खेतों में भरा रहने के कारण मेड़ भी बह जाती है। ऐसे में बार बार उसकी पैमाइश करानी पड़ती है, जिससे ग्रामीणों में झगड़े भी होते हैं।
गांव अरुआ के सरपंच देवेंद्र गोयल का कहना है प्रशासन की तरफ से अभी कोई निर्देश नहीं आए हैं लेकिन यमुना के बिल्कुल किनारे के खेत मालिकों को फिलहाल फसल नहीं बोने के लिए कहा गया है। पानी बढ़ने के बाद यमुना किस तरफ ज्यादा बढ़ेगी, यह भी निश्चित नहीं होता। फिलहाल ग्रामीणों ने कुछ तैयारियां कर रखी हैं जैसे किनारे के मकानों से सामान हटा लिया गया है, वहां केवल पशुओं को बांधा जाता है।