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औद्योगिक नगरी के लोगों को खूब भा रहा है एफआईआर ऐप

Sun, 15 May 2016 02:46 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
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स्मार्ट पुलिसिंग के तहत पीड़ित को त्वरित सहायता दिलाने के उद्देश्य से 9 अप्रैल को लांच किया गया एफआईआर ऐप औद्योगिक नगर के लोगों को खूब भा रहा है। हालांकि,ज्यादातर लोग अभी इसे सिर्फ चेक करने की गरज से ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
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9 मई तक यानी एक माह में करीब 382 लोगों ने इसका इस्तेमाल किया। वहीं 14 मई तक ऐप इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़कर 443 हो गई। एक माह में आई कॉल में मात्र 31 कॉल ही कार्रवाई करने लायक थीं। ऐप की कॉल रिसीव करने के लिए तैनात एएसआई नरेश कुमार ने बताया कि रोजाना औसतन 12 से 15 मैसेज आते हैं।

अधिकतर मैसेज करने वाले यह देखने के लिए कि एप्लिकेशन काम कर भी रहा है या नहीं, इसके लिए बटन दबाते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही कोई ऐप का बटन दबाता है तो कंप्यूटर स्क्रीन पर तेज बीप-बीप ध्वनि के साथ उसकी लोकेशन पर नीली बिंदु और फोन नंबर अंकित हो जाता है। तुरंत ही उस नंबर पर कॉल कर समस्या पूछी जाती है। कॉल करने पर अधिकतर लोग एप्लिकेशन बेहतर ढंग से काम कर रहा है, बहुत अच्छा, वेलडन, गुड रिस्पांस आदि कहते हैं। 
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केस एक: 12 अप्रैल 2016 की रात 9:36 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में गूगल मैप स्क्रीन पर एक नीले रंग से एक लोकेशन अंकित हुई और एक फोन नंबर दिखा। एफआईआर कंसोल पर बैठे एएसआई नरेश कुमार ने फोन नंबर पर कॉल किया। उधर से जवाब आया कि सर मैं एफआईआर ऐप की रिस्पांस चेक कर रहा था, बीस सेकेंड के भीतर ही कॉल आ गई, बहुत अच्छे।
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केस दो: 26 अप्रैल 2016 की रात 10:30 बजे कंट्रोल रूप में गूगल मैप के स्क्रीन पर ओल्ड फरीदाबाद के बराही तालाब के पास की लोकेशन पर नीली बिंदु उभरी और एक नंबर उभरा। एएसआई आनंद कुमार ने फोन किया तो उधर से युवक ने बताया कि ऑटो चालक परेशान कर रहा है।

उन्होंने स्क्रीन पर घटना स्थल के आसपास मौजूद पीसीआर का नंबर देख कर उसे सूचना दी। चंद मिनट में ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। ज्यादा किराया मांग रहे ऑटो चालक और कॉल करने वाले युवक का विवाद पुलिस ने सुलझवाया। 

तीन मिनट में उच्चाधिकारी तक पहुंचती है बात
एफआईआर एप्लिकेशन के नेटवर्क में कंट्रोल रूम टीम के साथ आला अधिकारी भी जुड़े हैं। यदि किसी मैसेज को तीन मिनट तक अटेंड नहीं किया जाता तो नीला बिंदु लाल हो जाता है और इसका मैसेज आला अधिकारी को चला जाता है। यही वजह है कि तीन एएसआई मुस्तैदी से चौबीस घंटे एफआईआर कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर रखते हैं। 

जीपीएस से जुड़ी हैं पीसीआर, एसएचओ जीप
पीड़ित तक जल्द सहायता पहुंचे इसके लिए जिले के 82 पुलिस वाहनों को ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से लैस किया गया है। इनमें 18 एसएचओ की जिप्सी 62 पीसीआर और बाकी राइडर हैं। कंप्यूटर स्क्रीन पर इन सभी वाहनों की लोकेशन हर समय दिखाई देती रहती है। कोई वाहन चल रहा है तो उसकी बिंदु नीली रंग की होगी।

कोई वाहन यदि खड़ा है तो पीली बिंदु होगी और यदि कोई वाहन स्टार्ट है, लेकिन चल नहीं रहा है तो उसका रंग हरा दिखता है। एएसआई नरेश कुमार ने बताया कि जैसे ही पीड़ित का मैसेज आता है तो स्क्रीन पर उसकी लोकेशन भी आ जाती है। स्क्रीन पर देखा जाता है कि कौन सी पीसीआर या राइडर पीड़ित के पास स्थित हैं उसे कॉल कर पीड़ित की लोकेशन (अक्ष, अक्षांश) बताई जाती है। पीसीआर अपने जीपीएस में लोकेशन फीड कर सटीकता के साथ मौके पर पहुंच जाता है। 

एफआईआर ऐप का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। खासकर महिला और बच्चों को इस एप के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। जल्द ही थानों में एफआईआर एप के साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1091, 1098 की जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित कराए जाएंगे।- हनीफ कुरैशी, पुलिस आयुक्त फरीदाबाद
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