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खोरी के लिए लड़ रहे लोगों ने यूएन मानवाधिकार आयोग के फैसले को सराहा

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फरीदाबाद। खोरी गांव में नगर निगम द्वारा की जा रही तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवाधिकार आयोग के विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार कार्रवाई रोकने की अपील की है। यूएन के इस फैसले को खोरी के लिए लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं काफी सराहा है। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ से दो महीने पहले लोगों का बिजली-पानी बंद करना मानवाधिकारों के नियमों का उल्लंघन है।
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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार से खोरी गांव के करीब एक लोगों को वहां से हटाने के लिए चल रही कार्रवाई को रोकने की अपील की है। मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि खोरी गांव को लेकर केंद्र व राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं है। खोरी में पहले बिजली पानी बंद कर दिया गया। हम भारत सरकार से खोरी गांव को उजाड़ने की योजना पर दोबारा विचार करने की अपील करते हैं।
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लोगों से बातचीत
खोरी बचाओ आंदोलन की ओर से कई बार विदेशी मीडिया को लिखा और खोरी गांव में हो रही कार्रवाई की जानकारी दी। यूएन मानवाधिकार का फैसला सराहनीय है। आखिरकार किसी ने तो हमारी आवाज सुनी है। - मीनू वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
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देश में अहिंसा परमो धर्म वाले लोग रहते हैं। देश में किसी की ताकत नहीं हुई कि वह इस मुद्दे पर अपनी बात रखे और कार्रवाई रुकवाई जाए। लेकिन यूएन मानवाधिकार ने इस बात पर तुरंत संज्ञान लिया और भारत सरकार को पत्र लिया, चिंता व्यक्त की। खोरी वासियों के नैतिक मूल्य व मानवीय अधिकारियों पर खुलकर अपनी बात रखी। ये हमारे लिए गर्व की बात है। - निर्मल गोहना, सदस्य, मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव
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कोर्ट के फैसला प्रशासन को अच्छे से पढ़कर और समझकर कार्रवाई करनी चाहिए। जिससे लोगों के अधिकारियों का भी ध्यान रखा जा सके। - शिव दत्त वशिष्ठ, अधिवक्ता
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