फरीदाबाद। माला देवी ने करीब 20 साल पहले खोरी गांव में प्लॉट लेकर घर बनाया था। कुछ महीने पहले ट्रेन हादसे में पति की मौत हो गई थी। अब मजदूरी कर 14 साल के बेटे को पढ़ा-लिखा रही है। अब उनका भी खोरी गांव में आशियाना छिन गया है।
अपने बारे में बताते हुए उनकी आंख नम हो गई। माला ने बताया कि चार हजार रुपये प्रति क्वॉयर गज से जमीन लेकर घर बनाया था। अब इनके पास कुछ नहीं बचा। घर होने से मजदूरी कर बेटे को पढ़ा रही थी। अब बेघर हो गई है। वहीं तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण बच्चे पढ़ाई बाधित हुई है। उन्होंने बताया कि उनके पास कोरोना काल में कुछ नहीं बचा। उनके पास खाने तक के लिए पैसे नहीं है। ऐसे में किराए के मकान लेकर कहां रह सकती है। वहीं सुरेश दैनिक मजदूरी का काम करता है। उनसे बताया कि सरकार ने उन्हें उजाड़ तो दिया। लेकिन, अब रहने के लिए अस्थायी इंतजाम तक नहीं कराया। इस गर्मी में वह लोग पेड़ के नीचे तंबू लगाकर रह रहे हैं। उनके तीन बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अपना घर होने से कामकर परिवार चला रहे थे। अब जाए तो कहां। रीता ने कहा कि सरकार गरीबों पर ध्यान नहीं दिया। बीस साल से यहां रह रहे हैं। इन लोगों को रहने और खाने के लिए ठोकरे खाने पड़ रहे हैं। बेहतर होगा कि गांव के पास ही सरकार राहत सहायता कैंप लगाकर लोगों को सभी सुविधाएं देती।
दिल्ली में मकान का किराया बढ़ा
सुहेल ने बताया कि दो दिन पहले घर को तोड़ दिया गया। इसके बाद दिल्ली में तीन हजार में एक कमरा लिया है। उनका कहना हैं कि खोरी गांव में तोड़फोड़ होने पर दिल्ली में किराए का रेट बढ़ गया है। दो हजार का कमरा अब तीन से चार हजार रुपये में मिल रहा है। वहीं कुछ लोगों के पास कमरा लेने में असमर्थ है। ऐसे में सरकारी सहायता की आस में है। वहीं पीड़ित लोगों को गांव में खाने-पीने की परेेेशानी उठानी पड़ रही है।