फरीदाबाद। प्रदेश सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए कोविड-19 सेस के फैसले की लोगों ने निंदा की। उन्होंने कहा कि एक तरफ लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे है। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों की जेब पर डाका डालने का काम किया है।
कोरोना वायरस संकट के कारण कच्चे तेल की मांग में कमी आई है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार बाजार में कच्चे तेल की कीमत काफी नीचे पहुंच गई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार खपत में 70 प्रतिशत की कमी है। इसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई कमी नहीं है। बल्कि प्रदेश सरकार की तरफ से पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपये कोविड-19 सेस लगाया गया। इसके साथ ही वेट की दर में इजाफा किया गया है। इस सीधा असर लोगों की जेब पड़ेगा। बीपीसीएल के एक पेट्रोल पंप संचालक ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने कहा था कि पेट्रोल और डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के भाव के आधार पर कम और ज्यादा होते हैं तो अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता हुआ है तो पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम करने चाहिए।
पहले ही पूरा वेतन न मिलने से परेशान हैं। अब कंपनी खुल गई है और दफ्तर जाना पड़ता है। ऐसे में सरकार को अभी पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाने चाहिए थे। - विश्वनाथ सिंह, सेक्टर-23
शराब पर सेस लगाना ठीक है मगर पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों का असर अप्रत्यक्ष रूप से सीधा लोगों पर पड़ता है। - अजय ऋषि, सेक्टर-21