मामला मकर संक्रांति के दिन का है, जब बच्चे को लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ के बाद शहर के अमृता अस्पताल में लाया गया। परिजनों के अनुसार बच्चा करीब एक सप्ताह से बीमार था और पहले एक अन्य अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन वहां राहत नहीं मिली। अस्पताल पहुंचने पर बच्चे का ऑक्सीजन स्तर काफी गिर चुका था और वह सांस के लिए जूझ रहा था।
डॉक्टरों ने रातभर बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू में निगरानी में रखा। अगली सुबह की गई आपातकालीन ब्रोंकोस्कोपी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बच्चे की दाईं मुख्य सांस नली में पूरी मूंगफली फंसी हुई थी, जिससे फेफड़े तक हवा नहीं पहुंच पा रही थी। मूंगफली को सुरक्षित तरीके से निकालते ही बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ।
सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनरी मेडिसिन डॉ. सौरभ पाहुजा ने बताया कि मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थ सांस की नली में जाकर नमी के संपर्क में आते ही फूल जाते हैं और हवा का रास्ता पूरी तरह बंद कर सकते हैं। यदि समय रहते मूंगफली न निकाली जाती, तो फेफड़ा बैठने, गंभीर संक्रमण या जानलेवा ऑक्सीजन कमी का खतरा था। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल बच्चे की स्थिति स्थिर है। ऑक्सीजन स्तर सामान्य हो चुका है और उसे निगरानी में रखा गया है। संभावना है कि अगले एक से दो दिन में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
खिलौनों को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह
डॉक्टरों ने इस मौके पर माता-पिता को यह भी चेताया कि केवल भोजन ही नहीं, बल्कि छोटे खिलौने भी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। विशेषकर चुंबकीय खिलौने या छोटे पुर्जों वाले खिलौने बच्चे आसानी से मुंह में डाल लेते हैं, जो सांस की नली में फंस सकते हैं या गंभीर आंतरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी कि ऐसे खिलौनों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और हर समय सतर्कता बरतें।