फरीदाबाद। बीके अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली असुविधाओं के बारे में जितना जिक्र किया जाए कम है। हर दिन एक समस्या होती है। कभी जांच मशीनें खराब तो कहीं डॉक्टर लापता। ऐसा ही एक और मामला सामने आया, जब हड्डी रोग विशेषज्ञ के कमरे के अंदर से बाहर तक मरीजों की लंबी फेहरिस्त दिखाई दी। खास ये रहा कि कुछ मरीज स्ट्रेचर पर लेटकर डॉक्टर साहब के आने का इंतजार करते रहे तो कुछ फर्श पर बैठकर। लेकिन डॉक्टर साहब इंतजार करते मरीजों की परवाह न करते हुए ऑपरेशन थियेटर की मशीनों के मेंटेनेंस में व्यस्त रहे। घंटों बाद डॉक्टर साहब आए और रोगियों की जांच शुरू हुई।
सिविल अस्पताल के एक हड्डी रोग विशेषज्ञ इन दिनों दिल्ली स्थित एम्स में प्रशिक्षण पर हैं। इस कारण बीके में एक मात्र डॉक्टर सतीश को हड्डी रोगियों की जांच का जिम्मा सौंपा गया। चूंकि डॉक्टर को अतिरिक्त कार्य की भी जिम्मेदारी दी गई है, इसलिए सप्ताह में दो से तीन दिन ही हड्डी रोगियों की ओपीडी का शेड्यूल बनाया गया है। बृहस्पतिवार को हड्डी रोग की ओपीडी होने के कारण काफी संख्या में मरीज अस्पताल में जांच को पहुंचे।
3 घंटे खाली रही डॉक्टर की कुर्सी
कई मरीज ऐसे भी थे जो इमरजेंसी में आए तो उन्हें परामर्श के लिए हड्डी रोगियों की ओपीडी में भेज दिया गया। बावजूद इसके डॉक्टर करीब तीन घंटे तक ओपीडी कक्ष से नदारद रहे। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीजों ने मामले की शिकायत की लेकिन डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में हैं, यह कहकर उन्हें टाल दिया गया।
अस्पताल के सहायक प्रबंधक डॉ. राजेश धीमन ने बताया कि बृहस्पतिवार को ऑपरेशन थिएटर में लगी मशीन को ठीक करने आए वेंडर की मौजूदगी में हड्डी रोग विशेषज्ञ मशीन की जांच कर रहे थे ताकि भविष्य में ऑपरेशन में परेशानी न हो। इस कारण डॉक्टर का वहां रहना जरूरी था। इस कारण डॉक्टर ओपीडी में देरी से पहुंचे।