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Faridabad News: जमाई कॉलोनी में 100 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त

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अरावली पहाड़ियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ निगम की साल की सबसे बड़ी कार्रवाई, खाली कराई जमीन पर होगा पौधरोपण, 15 जेसीबी-पोकलैंड मशीनों के साथ पहुंची टीम
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नंबर गेम-300 से अधिक पुलिसकर्मी रहे मौजूद

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अरावली पर्वतमाला में अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम ने बुधवार को जमाई कॉलोनी में साल का सबसे बड़ा तोड़फोड़ अभियान चलाया। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच करीब 15 जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की मदद से 100 से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। इनमें 60 से अधिक पक्के मकान, बाउंड्री वॉल, कमरे, शेड और अन्य कच्चे-पक्के ढांचे शामिल थे। कार्रवाई के दौरान किसी भी विरोध की स्थिति से निपटने के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मी और महिला पुलिस बल तैनात रहा।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार जमाई कॉलोनी अरावली की संरक्षित पहाड़ियों पर विकसित हुई बस्तियों में शामिल है। इससे पर्यावरणीय नुकसान होने के साथ अरावली की प्राकृतिक संरचना भी प्रभावित हो रही है। निगम का दावा है कि कार्रवाई से पहले क्षेत्र में मुनादी कराई गई। इसके बाद नोटिस चस्पा किए गए और लोगों को निर्माण स्वयं हटाने का समय भी दिया गया था। जानकारी के मुताबिक करीब तीन वर्ष पहले भी इसी क्षेत्र में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाया गया था। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अरावली क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
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अब बापू कॉलोनी, एसी नगर और अनंगपुर क्षेत्र पर नजर

जमाई कॉलोनी में कार्रवाई के बाद निगम का फोकस अब अन्य अवैध रूप से बसे इलाकों पर है। निगम सूत्रों के अनुसार बापू कॉलोनी, राहुल कॉलोनी, एसी नगर, आदर्श नगर और कोट क्षेत्र की पहाड़ियों में बने अवैध निर्माणों का सर्वे किया जा चुका है। आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में भी अभियान चलाया जाएगा।

खाली कराई गई जमीन पर विकसित होगी हरियाली

नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त गौरव अंतिल ने बताया कि अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य केवल निर्माण गिराना नहीं बल्कि अरावली क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि मानसून सीजन में खाली कराई गई भूमि पर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही जमीन की फेंसिंग कराई जाएगी और नियमित निगरानी रखी जाएगी ताकि दोबारा कब्जा न हो सके। उन्होंने कहा कि अरावली फरीदाबाद और पूरे एनसीआर के पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उजड़े घरों के बीच छलका दर्द
कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। वर्षों से बसे लोगों ने पुनर्वास की मांग उठाई और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल भी खड़े किए। लोगों का कहना है कि वे 1970 के समय परिवार के साथ आए थे। अब वे कहां जाएंगे। उन्हें मजबूरन सड़कों पर सामान रखना पड़ रहा है। रात के समय सड़क पर गुजरनी पड़ेगी और अब कहीं किराये पर कमरा लेने या नया घर लेने का कोई बजट नहीं है। अगर बारिश हो जाती है तो वे अपना सामान लेकर कहां जाएंगे।
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हमारा परिवार कई दशक से यहां रह रहा था। अब घर टूटने के बाद सबसे बड़ी चिंता बच्चों और बुजुर्गों को लेकर है।-रीनो

मकान बनाने में पूरी जिंदगी की कमाई लग गई थी। यदि हटाना ही था तो पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।-हारुणी

हमारे परिवार की कई पीढ़ियां इसी इलाके में रही हैं। अब अचानक बेघर होने की स्थिति बन गई है। अब कहां जाएंगे।-मुस्ताक अली

घर का सामान सड़क पर पड़ा है और परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। पुनर्वास की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।- शौकत अली
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