आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार 587 युवाओं ने आवेदन किया
हेमलता
बल्लभगढ़। केंद्र सरकार की ओर से युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का अपेक्षित लाभ जिले के युवा नहीं उठा पा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में इस योजना के तहत केवल 587 युवाओं ने आवेदन किया, जबकि इनमें से मात्र 83 युवाओं को ही योजना का लाभ मिल सका।
बल्लभगढ़ निवासी मोहित सिंह की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 में सबसे अधिक 219 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद 2022-23 में 128, 2023-24 में 131, 2024-25 में 57 और 2025-26 में 52 आवेदन आए। पांच वर्षों में कुल 224 आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि 354 आवेदन विभिन्न कारणों से खारिज कर दिए गए।
हालांकि स्वीकृत आवेदनों की संख्या 224 रही, लेकिन वास्तविक रूप से केवल 83 मामलों में ऋण स्वीकृत होकर परियोजनाएं स्थापित हो सकीं। इनमें 41 पुरुष और 42 महिला लाभार्थी शामिल हैं। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 37 और शहरी क्षेत्रों में 46 इकाइयों की स्थापना हुई।
आंकड़ों के अनुसार अधिकांश लाभार्थियों ने विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र को प्राथमिकता दी। पांच वर्षों में 70 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और 13 सेवा क्षेत्र की इकाइयां स्थापित हुईं। इस अवधि में कुल 452.15 लाख रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की जानकारी का अभाव, बैंक ऋण स्वीकृति में देरी, जटिल प्रक्रिया और दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण बड़ी संख्या में आवेदन खारिज हो रहे हैं। यदि आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन मिले तो योजना के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार का अवसर मिल सकता है।